नई दिल्ली, 12 अगस्त : दिल्ली उच्च न्यायालय ने 40 साल से भी अधिक पहले 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से संबंधित एक मामले में मुकदमा फिर से खोलने का आदेश दिया है। इसने ट्रायल कोर्ट को तीनों मामलों के रिकॉर्ड को फिर से बनाने का भी निर्देश दिया है, जिसमें तीनों मामलों में जांच के साथ-साथ मुकदमे के संचालन में कमियों को उजागर किया गया है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि सभी स्रोतों से ऐसे रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम प्रयास किए जाने चाहिए ताकि यह अदालत लंबित आपराधिक संशोधन याचिकाओं पर अंतिम निर्णय दे सके। निचली अदालत ने 1986 में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। ये मामले नवंबर 1984 में दिल्ली कैंट के राज नगर इलाके में हुए सिख विरोधी दंगों से संबंधित हैं।
इनमें से एक मामले में पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बरी कर दिया गया था और सीबीआई ने इसके खिलाफ अपील की थी। सोमवार को दिए गए अपने फैसले में पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित फैसले को प्रथम दृष्टया पढ़ने से पता चलता है कि निर्णयों पर उचित रूप से विचार नहीं किया गया है।
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