नई दिल्ली, 18 अगस्त : दुनिया ने एक बार फिर अमेरिका के दोहरे मापदंड देखे हैं। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर भारी टैरिफ लगाया, लेकिन चीन को ऐसी किसी भी कार्रवाई से बख्शा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि चीन पर प्रतिबंध लगाने से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच सकती है। वहीं दूसरी ओर, भारत 50 प्रतिशत टैरिफ का सामना कर रहा है। यह दोहरा मापदंड सवाल उठा रहा है कि अमेरिका भारत के साथ सौतेली माँ जैसा व्यवहार क्यों कर रहा है?
फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि अगर चीन पर रूसी तेल को रिफाइन करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश भी इस तरह के प्रतिबंधों से नाखुश हैं। रुबियो ने कहा, “चीन रूसी तेल को रिफाइन करके विश्व बाजार में बेचेगा, जिससे तेल और महंगा हो जाएगा या हमें कोई दूसरा रास्ता खोजना होगा।”
भारत पर टैरिफ का प्रभाव
अमेरिका ने भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शुरुआत में 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसे अब बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है।
रुबियो ने फॉक्स रेडियो पर कहा कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना “रूसी आक्रामकता को बढ़ावा दे रहा है” और अमेरिका-भारत संबंधों में “कड़वाहट पैदा कर रहा है”। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत की ऊर्जा ज़रूरतें बहुत बड़ी हैं और वह सस्ते रूसी तेल पर निर्भर है।
भारत ने अमेरिका के इस रवैये को “दोहरा मापदंड” करार दिया है। नई दिल्ली ने साफ़ कर दिया है कि वह रूस से तेल ख़रीदना बंद नहीं करेगा। भारत का कहना है कि जब चीन बिना किसी रोक-टोक के रूसी तेल ख़रीद रहा है, तो अमेरिका का भारत के साथ सख़्ती करना ग़लत है।
यह भी देखें : अमेरिका को सीधा संदेश! चीनी विदेश मंत्री पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

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