लंदन, 18 नवंबर : ब्रिटेन ने सोमवार को घोषणा की कि वह शरणार्थी का दर्जा अस्थायी कर देगा और अवैध रूप से आए लोगों के निर्वासन में तेज़ी लाएगा। इस बड़े बदलाव का उद्देश्य मौजूदा व्यवस्था के दुरुपयोग से निपटना है। गौरतलब है कि भारत समेत कई देशों के लोग वर्षों से ब्रिटेन में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। लेबर पार्टी सरकार ने हाल के दिनों में शरण नीति में सबसे व्यापक बदलावों की घोषणा की है। इसके तहत, शरणार्थियों के स्थायी रूप से बसने के लिए प्रतीक्षा अवधि को चार गुना बढ़ाकर 20 वर्ष कर दिया जाएगा।
ब्रिटिश सरकार ने अवैध अप्रवासियों और अपराधियों की वापसी स्वीकार नहीं करने पर अंगोला, नामीबिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य पर वीजा प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी। गृह सचिव शबाना महमूद ने ब्रिटिश अदालतों द्वारा यूरोपीय मानवाधिकार सम्मेलन (ईसीएचआर) की व्याख्या के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव रखा ताकि सरकार को इस बात पर अधिक नियंत्रण मिल सके कि ब्रिटेन में कौन रह सकता है। प्रस्तावों के तहत, सरकार ईसीएचआर के अनुच्छेद 8 की व्याख्या को बदलना चाहती है, जो पारिवारिक जीवन के अधिकार को नियंत्रित करता है। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि पारिवारिक संबंधों का अर्थ करीबी परिवार है, जैसे माता-पिता और बच्चे। यह लोगों को ‘ब्रिटेन में रहने के लिए संदिग्ध संबंधों का उपयोग करने’ से रोकेगा। इसने यह भी कहा कि ब्रिटेन समान विचारधारा वाले देशों के साथ अनुच्छेद 3 के कार्यान्वयन की समीक्षा करने के लिए काम करेगा, जो उत्पीड़न को रोकता है

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