नई दिल्ली, 2 फरवरी : हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले के ऊँचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन (एवलांच) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम एजेंसियों द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार, अगले 24 घंटों में 3000 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम स्तर के हिमस्खलन की संभावना जताई गई है। इसी बीच सोमवार दोपहर करीब 12 बजे किन्नौर कैलाश पर्वत के नीचे, किन्नौर के रिब्बा गांव के पास पहाड़ी क्षेत्र में बर्फ़ खिसक गई। बर्फ़ के खिसकने से यह नाले में जा गिरी। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई, लेकिन अचानक हुई इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
बर्फ़ीली हवाओं से बढ़ा डर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हिमस्खलन के बाद पूरे क्षेत्र में बर्फ़ का गुबार छा गया और तेज़ बर्फ़ीली हवाएं महसूस की गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन लोग काफी भयभीत हैं।
इन ज़िलों में भी बर्फ़बारी का खतरा
चेतावनी में किन्नौर के साथ-साथ चंबा और लाहौल-स्पीति ज़िलों को भी जोखिम वाले क्षेत्र बताया गया है। लगातार हो रही बर्फ़बारी और तापमान में गिरावट के कारण पहाड़ी ढलानों पर जमी बर्फ़ अस्थिर हो गई है, जिससे हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों, पर्यटकों और यात्रियों से अपील की है कि वे ऊँचाई वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। सीमा क्षेत्रों, पहाड़ी ढलानों और बर्फ़ से ढके इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि हिमस्खलन से जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है, इसलिए सतर्कता और समय रहते सावधानियाँ बेहद ज़रूरी हैं।

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