नई दिल्ली, 21 अगस्त : विपक्ष के भारी हंगामे के बीच, लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को 30 दिनों तक जेल में रहने पर अपने पदों से स्वतः बर्खास्त करने का प्रावधान है। विधेयक पेश करने के बाद, गृह एवं सहकारिता मंत्री ने इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का आग्रह किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए, अमित शाह ने विपक्ष के विरोध पर तीखा कटाक्ष किया।
कांग्रेस ने विरोध किया
अमित शाह ने इंटरनेट मीडिया एक्स पर पोस्ट किया कि, “एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को कानून के दायरे में लाने के लिए संविधान संशोधन पेश किया, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व में समूचे विपक्ष ने कानून के दायरे से बाहर रहने, जेल से सरकार चलाने और सत्ता का मोह न छोड़ने का आरोप लगाते हुए इसका विरोध किया।” दोपहर दो बजे लोकसभा में विधेयक पेश होते ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया।
संवैधानिक पद स्वीकार नहीं करता
अमित शाह ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि तत्कालीन कांग्रेस की केंद्र सरकार ने उन्हें झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजा था, लेकिन उन्होंने गिरफ्तारी से पहले ही इस्तीफा दे दिया था और जब तक अदालत से पूरी तरह बरी नहीं हो जाते, तब तक कोई संवैधानिक पद स्वीकार नहीं करेंगे। इसके बाद जैसे ही अमित शाह ने सदन से विधेयक को स्वीकार करने का आग्रह किया, विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया।
मार्शल को बुलाया गया।
शाह के आगे पहुँचते ही विपक्षी सांसदों ने विधेयक की प्रतियां फाड़कर शाह पर फेंकनी शुरू कर दीं। हंगामे और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच सीधे टकराव की आशंका के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोपहर तीन बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने से पहले सदन के अंदर मार्शल बुलाए गए। लेकिन किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए इस बार अमित शाह पहली पंक्ति की बजाय तीसरी पंक्ति में बैठे ताकि विपक्षी सांसदों द्वारा फेंके गए कागज़ उन तक न पहुँच सकें।
कानूनी कार्रवाई न करने का प्रावधान
शाह ने सरकार से इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का आग्रह किया। संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य होंगे और इसे संसद के आगामी शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट देनी होगी। अमित शाह ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि 39वां संविधान संशोधन विधेयक इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लाया गया था और इसमें प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने का प्रावधान किया गया था।
यह प्रावधान आपातकाल के दौरान लाया गया था।
उनके अनुसार, कांग्रेस की कार्यसंस्कृति और नीति प्रधानमंत्री को कानून से ऊपर रखने की है। वहीं, भाजपा प्रधानमंत्री के साथ-साथ मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को भी कानून के दायरे में ला रही है। इंदिरा गांधी आपातकाल के दौरान यह प्रावधान लाई थीं। संविधान के 130वें संशोधन के ज़रिए अगर कोई व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक जेल में रहता है, तो उसे पद से हटाने का प्रावधान है। केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक के ज़रिए इसे केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने का प्रावधान है, वहीं जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक के ज़रिए इसे जम्मू-कश्मीर में भी लागू किया जा चुका है।
बिल में क्या है ?
- किसी भी मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को जेल जाने के 30 दिन के भीतर इस्तीफा देना होगा।
- यदि वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 31वें दिन उनका पद स्वतः रिक्त हो जाएगा। जिन मामलों में न्यूनतम 5 वर्ष के कारावास का प्रावधान है, उनमें लगातार 30 दिन जेल में रहने पर कार्रवाई की जाएगी।
- ज़मानत मिलने पर कोई भी व्यक्ति फिर से मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बन सकता है। केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम 1963 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 में भी आवश्यक संशोधन किए जाएँगे ताकि इसे पूरे देश में एक साथ लागू किया जा सके। इन दोनों अधिनियमों में संशोधन से संबंधित एक विधेयक भी पेश किया गया है।

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