January 8, 2026

FCI के जीएम पद पर यूटी कैडर IAS की नियुक्ति पर भगवंत मान ने जताई नाराज़गी

FCI के जीएम पद पर यूटी कैडर...

चंडीगढ़, 6 जनवरी : भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पंजाब क्षेत्र के लिए चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय में जनरल मैनेजर (जीएम) की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सिविल सेवा बोर्ड द्वारा एजीएमयूटी (यूटी) कैडर की आईएएस अधिकारी नितिका पवार की नियुक्ति की सिफारिश के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस फैसले पर कड़ी नाराज़गी जताई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला दशकों पुरानी प्रशासनिक परंपरा और व्यावहारिक जरूरतों के खिलाफ है।

पंजाब कैडर की परंपरा का हवाला

मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि वर्ष 1965 में एफसीआई की स्थापना के बाद से अब तक पंजाब क्षेत्र के जनरल मैनेजर पद पर नियमित रूप से पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारियों की ही नियुक्ति होती रही है। रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले छह दशकों में इस पद पर कुल 37 अधिकारियों ने कार्यभार संभाला, जिनमें से 23 नियमित नियुक्तियां थीं और सभी पंजाब कैडर से संबंधित थे। अन्य कैडर के अधिकारियों को केवल अस्थायी या एडहॉक आधार पर अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यवस्था से जुड़ा मामला

राज्य सरकार का तर्क है कि एफसीआई पंजाब क्षेत्र का कार्य केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर राज्य की कृषि व्यवस्था और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। पंजाब देश के केंद्रीय खाद्य भंडार में सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य है। ऐसे में खरीद, भंडारण और वितरण प्रणाली की गहरी समझ रखने वाले पंजाब कैडर के अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

योग्य अधिकारियों का पैनल पहले से उपलब्ध

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पहले ही पंजाब कैडर के योग्य आईएएस अधिकारियों का एक पैनल केंद्र को भेज चुकी है। यदि नए पैनल की आवश्यकता होती है, तो उसे भी तुरंत उपलब्ध कराया जा सकता है। वर्तमान में पंजाब कैडर में 200 से अधिक आईएएस अधिकारी हैं, जिनमें से किसी की भी नियुक्ति पर राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संघीय ढांचे, राज्यों के अधिकारों और पारंपरिक प्रशासनिक संतुलन से भी जुड़ गया है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह पंजाब सरकार की मांग मानकर फैसले पर पुनर्विचार करती है या सिविल सेवा बोर्ड की सिफारिश पर आगे बढ़ती है।

यह भी देखें : गैंगस्टरों से त्रस्त पंजाब के व्यापारी निजी सुरक्षा गार्ड रखने को मजबूर