February 19, 2026

सावधान! लॉन्ग कोविड बन सकता है अल्जाइमर का कारण?

सावधान! लॉन्ग कोविड बन सकता है...

वॉशिंगटन, 18 फरवरी: कोविड से ठीक होने के बाद भी कई लोगों में महीनों तक थकान, ध्यान की कमी और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं बनी रहती हैं, जिसे ‘लॉन्ग कोविड’ कहा जाता है। अब अमेरिका की न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन में संकेत मिला है कि लॉन्ग कोविड केवल सामान्य कमजोरी नहीं, बल्कि दिमाग में ऐसे बदलाव भी ला सकता है जो अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़े पाए गए हैं। यानी थकान, ध्यान में कमी और स्मृति से जुड़ी दिक्कतें भविष्य में अल्जाइमर के खतरे को बढ़ा सकती हैं।

एमआरआई स्कैन में चौंकाने वाले निष्कर्ष

अध्ययन में 179 लोगों के दिमाग का एमआरआई स्कैन किया गया। इनमें लॉन्ग कोविड से जूझ रहे मरीज, कोविड से पूरी तरह ठीक हो चुके लोग और वे लोग भी शामिल थे जिन्हें कभी संक्रमण नहीं हुआ था। जांच में पाया गया कि लॉन्ग कोविड वाले लोगों के दिमाग का ‘कोरॉयड प्लेक्सस’ नामक हिस्सा औसतन लगभग 10 प्रतिशत बड़ा था और उसमें रक्त प्रवाह कम पाया गया।

यह हिस्सा सूजन को नियंत्रित करने और दिमाग से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए इसमें बदलाव होने पर मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।

याददाश्त और ध्यान पर असर

वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन प्रतिभागियों में यह हिस्सा अधिक बड़ा था, उनके स्मृति और ध्यान से जुड़े परीक्षणों में औसतन कम अंक आए। साथ ही खून में कुछ ऐसे प्रोटीन का स्तर भी अधिक पाया गया, जो सामान्यतः मस्तिष्क क्षति और अल्जाइमर रोग से जुड़े माने जाते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड के बाद कुछ मामलों में लंबे समय तक चलने वाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया रक्त वाहिकाओं में सूजन, मोटापन और दाग (स्कार टिशू) बना सकती है, जिससे मस्तिष्क में रक्त और द्रव का सामान्य प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि अभी यह साबित नहीं हुआ है कि लॉन्ग कोविड भविष्य में निश्चित रूप से अल्जाइमर का कारण बनेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग कोविड से गुजर चुके लोगों की लंबे समय तक निगरानी और बड़े स्तर पर आगे शोध किए जाने की जरूरत है, ताकि मस्तिष्क पर इसके प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

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