चंडीगढ़, 25 नवम्बर : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि व्यक्तिगत हैसियत से जारी किए गए चेक के बाउंस होने को नैतिक पतन का अपराध नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही, न्यायालय ने पंजाब राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को आदेश दिया कि वह मृतक चौकीदार को 15 जून, 2022 तक सेवा में स्वीकार करे और उसके परिवार को ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण सहित सभी सेवा लाभ ब्याज सहित अदा करे।
अदालत ने यह भी कहा कि नीति के अनुसार अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए उनके बेटे के मामले पर विचार किया जाना चाहिए। यह मामला फिरोजपुर निवासी एक चौकीदार की पत्नी और बेटे द्वारा दायर याचिका से संबंधित था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चेक बाउंस मामले के आधार पर 2020 में उन्हें गलत तरीके से नौकरी से निकाल दिया गया था और बाद में परिवार को मिलने वाले सेवा लाभों से वंचित कर दिया गया था। न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि चेक बाउंस का मामला उनके व्यक्तिगत वित्तीय संकट से संबंधित था, न कि किसी आपराधिक इरादे से।
सेवा लाभ रोकना कानूनी रूप से गलत
अदालत ने कार्मिक विभाग की 24 जनवरी, 2023 को जारी सूची का हवाला देते हुए कहा कि नैतिक पतन के अपराधों में भ्रष्टाचार, मादक पदार्थों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, मानव तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराध शामिल हैं, जबकि चेक बाउंस इनके अंतर्गत नहीं आता। अंत में, अदालत ने बर्खास्तगी और परिवार के मांग पत्र को खारिज करने के आदेशों को रद्द कर दिया और कहा कि केवल चेक बाउंस अधिनियम की सजा के आधार पर सेवा लाभ रोकना कानूनी रूप से गलत है। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए परिवार को सभी लाभ देने और अनुकंपा नीति के अनुसार बेटे के मामले को देखने का निर्देश दिया।
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