अमृतसर, 6 जनवरी : अकाल तख़्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को 15 जनवरी को अकाल तख़्त सचिवालय में तलब किया है। यह समन सिख विरोधी मानसिकता के प्रदर्शन और आपत्तिजनक टिप्पणियों के आरोपों के तहत जारी किया गया है।
अकाल तख़्त की मर्यादा पर टिप्पणी का आरोप
अकाल तख़्त सचिवालय के इंचार्ज बगीचा सिंह द्वारा मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि भगवंत मान ने अकाल तख़्त की सर्वोच्चता, मर्यादा और गुरु की गोलक के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां कर सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि मुख्यमंत्री के कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वे संत जरनैल सिंह खालसा भिंडरांवाले की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक हरकत करते दिखाई देते हैं। जत्थेदार गड़गज्ज ने स्पष्ट किया कि इन वीडियो की फोरेंसिक जांच करवाई जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो पंथक परंपराओं के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अकाल तख़्त के समक्ष पेशी नहीं, सचिवालय में बुलावा
मीडिया से बातचीत में जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि मुख्यमंत्री ‘पतित’ हैं और सिख परंपरा के अनुसार उन्हें अकाल तख़्त साहिब की फसील के सामने पेश नहीं किया जा सकता। इसी कारण उन्हें व्यक्तिगत रूप से अकाल तख़्त सचिवालय में बुलाया गया है। जत्थेदार ने 2015 के बरगाड़ी गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी मामले और 2017 के मौड़ धमाके में मौजूदा सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इन मामलों में गुरमीत राम रहीम, हनीप्रीत और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर पंजाब क्यों नहीं लाया गया।
स्पीकर कुलतार सिंह संधवां से भी जवाब संभव
उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने बरगाड़ी बेअदबी मामले का केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया और एक पक्ष बनकर साध को बचाने का काम किया। उनका कहना था कि सरकार सिखों को इंसाफ दिलाने में पूरी तरह विफल रही है। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने तीन साल पहले बरगाड़ी मोर्चे के दौरान संगत से तीन महीनों में इंसाफ दिलाने का वादा किया था, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला। इस संबंध में तथ्यों को एकत्र कर स्पीकर से भी जवाब तलब किया जा सकता है।
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