पटियाला, 1 फरवरी : पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला की शिक्षक संगठन PUTA (पंजाबी यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच प्रमोशन (तरक्कियों) को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है। PUTA ने विश्वविद्यालय के उस फैसले का कड़ा विरोध किया है, जिसके तहत कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के अंतर्गत प्रमोशन पाने वाले शिक्षकों के पहले से प्रकाशित शोध पत्रों की प्लेजरिज्म (नकल) जांच अनिवार्य करने की शर्त रखी गई है।
UGC नियमों के उल्लंघन का आरोप
PUTA के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह विर्क और सचिव चरणजीव सिंह ने वाइस-चांसलर डॉ. जगदीप सिंह को सौंपे गए ज्ञापन में इस फैसले को UGC नियमों का उल्लंघन और शिक्षकों के अधिकारों पर हमला बताया है। संगठन का कहना है कि UGC के 2018 के नियमों के अनुसार किसी भी शोध पत्र की प्लेजरिज्म जांच उसके जमा किए जाने के समय होती है, न कि वर्षों बाद प्रमोशन के समय।
प्रशासन पर प्रमोशन में देरी कराने का आरोप
PUTA ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन बिना किसी ठोस कानूनी आधार के ऐसे नियम थोप रहा है, ताकि शिक्षकों की तरक्कियों में देरी की जा सके और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा सके। संगठन का कहना है कि यह फैसला शिक्षकों के हितों के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस कथित ‘गैर-कानूनी’ शर्त को जल्द वापस नहीं लिया गया, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष शुरू करेंगे।
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