नई दिल्ली, 8 जनवरी : वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम विकसित किया है, जो नींद के दौरान मिलने वाले डेटा के आधार पर 100 से अधिक बीमारियों के विकसित होने के खतरे का अनुमान लगा सकता है। ‘स्लीपएफएम’ नामक इस AI मॉडल को अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। इस मॉडल को तैयार करने के लिए 65 हजार से ज्यादा प्रतिभागियों से एकत्र किए गए करीब 6 लाख घंटे की नींद से जुड़े डेटा का उपयोग किया गया।
नेचर मेडिसिन में प्रकाशित शोध
यह अहम शोध प्रतिष्ठित जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। शोध में बताया गया है कि यह AI मॉडल नींद के डेटा का विश्लेषण कर भविष्य में होने वाली बीमारियों की सटीक भविष्यवाणी कर सकता है।
शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य रिकॉर्ड में मौजूद 1,000 से अधिक रोग श्रेणियों का अध्ययन किया। इसके आधार पर यह पाया गया कि मरीज की नींद के डेटा से करीब 130 बीमारियों के जोखिम का बेहद सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इमैनुएल मिगनॉट ने कहा कि नींद के अध्ययन के दौरान बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण संकेत रिकॉर्ड होते हैं। पॉलिसोम्नोग्राफी तकनीक के जरिए दिमाग की गतिविधि, दिल की कार्यप्रणाली, सांस लेने के संकेत और आंखों की गतिविधियों को सेंसर के माध्यम से दर्ज किया जाता है।
कैंसर और मानसिक रोगों की भविष्यवाणी में उपयोगी
इस AI मॉडल की भविष्यवाणियां कैंसर, गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं, संचार संबंधी बीमारियों और मानसिक रोगों के मामलों में विशेष रूप से अहम पाई गई हैं। शोध में यह भी सामने आया है कि यह AI सिस्टम पार्किंसन रोग के जोखिम की पहचान करने में भी काफी प्रभावी साबित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक स्वास्थ्य जांच के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
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