नई दिल्ली, 31 मार्च : विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। हर क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण भिन्न हैं, लेकिन एक बात सभी जगह समान है – लोकलुभावन योजनाओं का वादा। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत वित्तीय सहायता की राशि बढ़ाने और बेरोजगार युवाओं को आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।
सत्ता की कुर्सी तक पहुंचना मकसद
असम में कांग्रेस ने यह वादा किया है कि यदि वह सत्ता में आती है, तो महिलाओं को अपने व्यवसाय शुरू करने के लिए 50 हजार रुपये की सहायता प्रदान करेगी। इसी तरह, तमिलनाडु की AMMK पार्टी ने जनता से 120 वादे किए हैं, जिनमें किसानों के कर्ज माफी का भी प्रावधान शामिल है। इन सभी घोषणाओं का उद्देश्य मतदाताओं को आकर्षित करना और चुनावी लाभ प्राप्त करना है।
वोटिंग का समय अभी बाकी
कई राजनीतिक दलों के घोषणापत्र अभी जारी होने हैं, इसलिए इस प्रकार के और घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं। यह एक सामान्य प्रवृत्ति बन चुकी है, जिसमें चुनावी घोषणापत्र को कमतर दिखाने के लिए उससे भी बड़े वादे किए जाते हैं। हाल ही में बिहार का उदाहरण सामने आया है, जहां विधानसभा चुनाव के दौरान सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया था। इसके साथ ही, NDA सरकार ने महिलाओं के लिए रोजगार योजना के तहत 10,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की थी।
रेवड़ी कल्चर के साथ बढ़ रहा कर्ज
जिस तेजी के साथ रेवड़ी कल्चर को पॉलीटिकल पार्टियों द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है, उसके साथ साथ राज्यों का कर्ज भी लगातार बढ़ता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने सब्सिडी पर कुल 1.87 लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि 2024-25 में यह राशि बढ़कर 4.72 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यह आंकड़ा राज्यों के कुल खर्च का लगभग 10% है, जो कि एक चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
इसके साथ ही, राज्यों का कर्ज भी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वे रेवड़ी कल्चर से बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं हैं। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में 2023 में जीडीपी के मुकाबले कर्ज का अनुपात 34% था। रिपोर्टों के अनुसार, बंगाल पर लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि तमिलनाडु पर यह आंकड़ा 9.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह स्थिति न केवल आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि भविष्य में विकास की संभावनाओं को भी प्रभावित कर सकती है।
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