चंडीगढ़, 8 मार्च : देश में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन तेजी से बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019–2021) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि भारत में प्रजनन आयु वर्ग के लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति हाईपरटेंशन से पीड़ित है, लेकिन करीब 70 प्रतिशत लोगों को अपनी बीमारी की जानकारी ही नहीं है।
अध्ययन में सामने आए चिंताजनक आंकड़े
अध्ययन करने वाले पीजीआई के प्रोफेसर डॉ. सोनू गोयल के अनुसार यह स्थिति आने वाले वर्षों में दिल की बीमारी और स्ट्रोक जैसे गंभीर रोगों का खतरा बढ़ा सकती है। यह अध्ययन हाल ही में मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के तहत 15 से 54 वर्ष आयु वर्ग के 1.26 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि देश में हाइपरटेंशन की कुल दर 18.3 प्रतिशत है।
पुरुषों में ज्यादा खतरा
अध्ययन में यह भी सामने आया कि पुरुषों में यह समस्या महिलाओं की तुलना में अधिक है। पुरुषों में हाइपरटेंशन की दर: 21.6 प्रतिशत, महिलाओं में हाइपरटेंशन की दर: 14.8 प्रतिशत। डॉक्टरों के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए बहुत से लोगों को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चलता।
इन लोगों में इलाज और नियंत्रण सबसे कम
डॉ. सोनू गोयल के मुताबिक कुछ वर्गों में इलाज तक पहुंच और बीमारी का नियंत्रण बेहद कम पाया गया है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले, कम पढ़े-लिखे, आर्थिक रूप से कमजोर, अविवाहित तथा तंबाकू या शराब का सेवन करने वाले लोगों में हाइपरटेंशन का उपचार और नियंत्रण सबसे कम है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हाइपरटेंशन को नियंत्रित रखने के लिए
- नियमित ब्लड प्रेशर जांच
- संतुलित आहार
- नमक का कम सेवन
- नियमित व्यायाम
- तंबाकू और शराब से दूरी
बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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