चंडीगढ़, 7 नवम्बर : आर्थिक तंगी से जूझ रही पंजाब सरकार की नजर अब विभिन्न विभागों की सरकारी जमीनों पर है, जिसे सरकार इस संकट के समाधान के लिए बेचने की सोच रही है। सरकार की नजर अकेले लुधियाना शहर में 124.34 एकड़ जमीन पर है, जो शहर के बीचोंबीच है। सरकार इसे खाली सरकारी जमीन के इष्टतम उपयोग योजना के तहत बेचना चाहती है। सबसे ज्यादा जमीन जल स्रोत और पावरकॉम की है, जिसकी कीमत करोड़ों में लगाई जा रही है।
सभी विभगों को जमीनें तुरन्त गमाडा को सौंपने के आदेश
राज्य सरकार ने इन दोनों विभागों समेत अन्य विभागों से कहा है कि वे अपनी-अपनी जमीन चिह्नित कर ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (ग्लाडा) को सौंप दें ताकि वह इसकी नीलामी करके पैसा जुटा सके। सरकार लाडोवाल स्थित बीज फार्म की जमीन भी बेचना चाहती है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी कितनी जमीन बेची जानी है।
लुधियाना में सरकारी जमीन बेचने की तैयारी एक महीने पहले से शुरू हो गई है। इसी वजह से एक अक्टूबर को मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने संबंधित विभागों के मुख्य सचिवों और प्रशासनिक सचिवों के साथ बैठक की थी। इस बैठक के मिनट्स भी जारी कर दिए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि सभी विभाग अपनी-अपनी जमीनों की निशानदेही का काम जल्द से जल्द पूरा कर ग्लाडा को सौंप दें।
इस बैठक में जिन संपत्तियों पर चर्चा हुई, उनमें डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के सामने जल संसाधन विभाग की 8.18 एकड़ जमीन शामिल है, जिसका एक हिस्सा नीलामी के लिए रखा गया है। इसके अलावा लुधियाना के जिला पुलिस मुख्यालय के सामने और पीछे पीडब्ल्यूडी कॉलोनी साइट वन की 3.51 एकड़ और 1.7 एकड़ जमीन भी शामिल है, जो पहले भी नीलामी के लिए रखी जा चुकी हैं, लेकिन सरकार को उम्मीद के मुताबिक रकम नहीं मिल रही है।
बैठक में फैसला लिया गया कि जहां रिजर्व प्राइस ज्यादा होने के कारण जमीन नहीं बिक पा रही है, वहां नए सिरे से फैसला लिया जाए।
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