January 17, 2026

किसान–मज़दूर संगठनों का डीसी दफ्तरों के बाहर जोरदार धरना

किसान–मज़दूर संगठनों का डीसी...

चंडीगढ़, 17 जनवरी : संयुक्त किसान मोर्चा और संयुक्त मज़दूर मोर्चा के आह्वान पर आज पंजाब भर में डिप्टी कमिश्नरों के दफ्तरों के बाहर तीन घंटे तक धरने दिए गए। दोपहर 12 बजे शुरू होकर 3 बजे तक चले इन धरनों में ठंड के बावजूद किसानों, मज़दूरों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, युवाओं और बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

निजीकरण के खिलाफ 26 जनवरी को देशव्यापी मार्च

धरनों के दौरान ऐलान किया गया कि 26 जनवरी को पूरे देश में निजीकरण की नीतियों के खिलाफ जनमार्च निकाले जाएंगे। वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण से आम लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। आंदोलनकारी नेताओं ने पंजाब सरकार पर प्रेस की आज़ादी पर हमले का आरोप लगाया। पत्रकारों पर केस दर्ज करने और ‘हिंद समाचार समूह’ के खिलाफ की गई कार्रवाई को ज़बानबंदी करार दिया गया।

किसान–मज़दूरों की प्रमुख मांगें

धरनों में बिजली संशोधन बिल और बीज बिल रद्द करने, मुक्त व्यापार समझौतों से कृषि व संबद्ध क्षेत्रों को बाहर रखने, चार श्रम संहिताएं रद्द करने, मनरेगा कानून बहाल करने की मांग उठी। साथ ही सभी फसलों पर एमएसपी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार खरीद की गारंटी, किसानों–मज़दूरों का संपूर्ण कर्ज माफी, 60 वर्ष की आयु पर 10,000 रुपये मासिक पेंशन देने की मांग की गई।

बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़ा देने की मांग

नेताओं ने पंजाब सरकार से बाढ़ प्रभावित किसानों और मज़दूरों को पहले दिए गए मांग-पत्र के अनुसार मुआवज़ा देने तथा कच्ची जमीन के मालिकों को भी पूरा मुआवज़ा देने की मांग की। धरनों को संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब के बलबीर सिंह राजेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, हरिंदर सिंह लाखोवाल, मनजीत सिंह धनेर, बूटा सिंह बुर्ज गिल, डॉ. दर्शन पाल सहित अनेक किसान, मज़दूर और कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया। एसकेएम की ओर से बलदेव सिंह निहालगढ़, मुकेश चंद्र शर्मा और बिंदर सिंह गोलेवाला ने पंजाब में हुए धरनों की रिपोर्ट जारी की।

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