नई दिल्ली, 1 मार्च : भारत और इज़राइल के रिश्तों को अक्सर कूटनीतिक नजरिए से देखा जाता है, लेकिन इन संबंधों को समझने का सबसे ठोस तरीका यह है कि इनके जमीनी नतीजों को देखा जाए। खेती, जल प्रबंधन, स्टार्टअप इकोसिस्टम और सुरक्षा संस्थानों में यह सहयोग सीधे तौर पर नागरिकों तक पहुंच रहा है। भारत और इज़राइल मिलकर Indo-Israel Agricultural Project चला रहे हैं, जो ज्ञान हस्तांतरण और प्रदर्शन आधारित मॉडल पर काम करता है। इस परियोजना का मुख्य आधार है सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) का नेटवर्क।
भारत सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 12 राज्यों में 35 पूरी तरह कार्यरत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा चुके हैं और इन्हें बढ़ाकर 100 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। ये केंद्र उन्नत इज़राइली कृषि तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाकर किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हैं। यह मॉडल तकनीक “आयात” करने की बजाय उसे जमीन पर प्रदर्शित करने पर जोर देता है। किसान अपनी मिट्टी और जलवायु में काम करती तकनीक को देखकर उसे आसानी से अपनाते हैं, जिससे जोखिम कम होता है और उत्पादकता बढ़ती है।
जल सुरक्षा: शहरों और उद्योगों के लिए समाधान
भारत में जल संकट केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। तेजी से बढ़ते शहर और उद्योग भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में भारत-इज़राइल सहयोग जल प्रबंधन, माइक्रो-सिंचाई, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण (वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग) और समुद्री जल के लवण-उन्मूलन (डिसेलिनेशन) जैसे क्षेत्रों तक फैला है।
हाल ही में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम (विजाग) में 100 MLD क्षमता वाले डिसेलिनेशन प्लांट की योजना को तेज किया गया है। इस परियोजना में इज़राइल की कंपनी IDE Technologies तकनीकी साझेदार के रूप में जुड़ी है। ऐसे संयंत्र औद्योगिक जल आपूर्ति सुनिश्चित कर पीने के पानी पर दबाव कम करने में मदद करते हैं, जिससे सीधे तौर पर आम नागरिकों को लाभ मिलता है।
नवाचार और स्टार्टअप: I4F के जरिए संयुक्त अनुसंधान
भारत और इज़राइल ने औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास को संस्थागत रूप देने के लिए India-Israel Industrial R&D and Technological Innovation Fund (I4F) की स्थापना की है। यह लगभग 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर का बहुवर्षीय फंड है, जो संयुक्त आरएंडडी और व्यावसायीकरण परियोजनाओं को समर्थन देता है।
भारत की ओर से Technology Development Board और इज़राइल की ओर से Israel Innovation Authority इस पहल को आगे बढ़ा रहे हैं। यह ढांचा केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि साझेदार चयन, प्रस्ताव आमंत्रण और पायलट प्रोजेक्ट तक एक कार्यशील प्रक्रिया सुनिश्चित करता है।
इससे स्टार्टअप और उद्योगों को नई तकनीकों के विकास और बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलता है।
सुरक्षा और रक्षा: संस्थागत क्षमता का विस्तार
भारत-इज़राइल सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र भी है। उदाहरण के तौर पर, Barak-8 / LR-SAM जैसे संयुक्त विकास कार्यक्रमों को रक्षात्मक प्रणालियों में सहयोग के प्रमुख उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
हाल ही में वैश्विक रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि इज़राइल की कंपनी Elbit Systems के साथ मिलकर विकसित भारतीय ISR ड्रोन कार्यक्रम देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। इससे दीर्घकालिक रूप से रक्षा उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।

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