नई दिल्ली, 1 जनवरी : भारतीय जनता पार्टी के लिए वर्ष 2025 एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा। पिछले वर्ष, दिल्ली चुनावों में भाजपा की जीत ने पार्टी के 27 वर्षों के सूखे को समाप्त किया, जबकि बिहार विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। 2025 के चुनावों में उपराष्ट्रपति का चुनाव भी हुआ, और वहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत ने राजनीतिक माहौल को और भी गरमा दिया। इसी बीच, मतदान में धांधली, चुनावी सुधार और मतदाता सत्यापन अभियान जैसे मुद्दों पर तीखी बहस छिड़ गई।
अब, 2026 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा की मजबूत चुनावी रणनीति कारगर होगी या विपक्ष की एकता विजयी होगी।
महाराष्ट्र में दो भाइयों का पुनर्मिलन हुआ
साल की शुरुआत 15 जनवरी को महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों से होगी, जिसमें मुंबई का बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) केंद्र में होगा। यहां भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का मुकाबला महा विकास अघाड़ी (एमवीए) से होगा, जिसमें कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शिवसेना शामिल हैं। मुख्य कहानी पारिवारिक पुनर्मिलन के बारे में है।
इस चुनाव में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे अपनी 20 साल पुरानी दुश्मनी को भुलाकर एकजुट हो रहे हैं, जबकि शरद पवार और अजीत पवार के बीच 2023 के चुनावों को लेकर जो मतभेद था, वह अब सुलझता हुआ प्रतीत हो रहा है। एकनाथ शिंदे के विद्रोह ने शिवसेना को विभाजित कर दिया था, लेकिन अब भाजपा की मजबूत स्थिति गठबंधन पर सवाल खड़े कर रही है। दिसंबर 2025 के पंचायत चुनावों में भाजपा का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी-भाजपा की टक्कर
फरवरी-मार्च में सभी की निगाहें पश्चिम बंगाल पर टिकी होंगी, जहां ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का भाजपा से टकराव होगा। ममता बनर्जी ने 2019 के संघीय चुनावों से शुरू करते हुए, भाजपा पर लगातार तीसरी जीत हासिल की है। यह चुनाव ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा और उनकी पार्टी की जीतने की क्षमता की परीक्षा लेगा।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भाजपा की एक सशक्त आवाज हैं, लेकिन नागरिकता कानून और जातिगत मुद्दे चुनावों को दिलचस्प बना देंगे। विपक्ष को आर्थिक मुद्दों पर एकजुट होना होगा।
क्या विजय तमिलनाडु में एक मजबूत दावेदार बन पाएगा?
तमिलनाडु में भाजपा का प्रदर्शन हमेशा से कमजोर रहा है, लेकिन अब अभिनेता विजय की फिल्म ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ एक नई चुनौती पेश कर रही है। मुख्य मुकाबला डीएमके और एआईएडीएमके के बीच है। विजय की रैलियों में भगदड़ जैसी घटनाएं भी चुनावी सुर्खियों में बनी रहेंगी।

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