देहरादून, 3 सितंबर : वह दिन दूर नहीं जब केदारनाथ और हेमकुंट साहिब की कठिन यात्रा और भी आसान, सुलभ और समय-कुशल हो जाएगी। उत्तराखंड सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसके तहत राज्य में दो मेगा रोपवे परियोजनाएँ विकसित की जाएँगी। यह पहल न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि पर्यटन को भी नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।
सिर्फ 36 मिनट में केदारनाथ पहुंचेंगे श्रद्धालु
6800 करोड़ रुपये के निवेश के साथ यह समझौता हुआ है, जिसमें दो प्रमुख रोपवे परियोजनाएँ शामिल हैं। पहली परियोजना सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक बनाई जाएगी, जो 12.9 किलोमीटर लंबी होगी और इसकी अनुमानित लागत लगभग 4100 करोड़ रुपये है। दूसरी परियोजना गोविंदघाट से पवित्र हेमकुंट साहिब तक 12.4 किलोमीटर लंबी रोपवे लाइन बनाने की है, जिस पर लगभग 2700 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एनएचएलएमएल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत एक विशेष प्रयोजन वाहन के रूप में कार्य करता है।
इसके शुरु होते ही श्रद्धालुओं को 8-9 घंटे पैदल चलने की जरूरत नहीं होगी और सिर्फ 36 मिनट में ही केदारधाम पहुंच सकेंगे।
यह परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पर्वतमाला परियोजना के अंतर्गत लाई जा रही है। इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार ने इसी वर्ष मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंजूरी दी थी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा और राज्य के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ये परियोजनाएं उत्तराखंड की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएंगी, साथ ही ये राज्य की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगी।
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