January 8, 2026

सरकार बी.बी.एम.बी. संबंधी नियमों की पूरी प्रति जारी करे : हाई कोर्ट

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चंडीगढ़, 25 सितंबर : हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका पर बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में गरमागरम बहस हुई। पंजाब सरकार ने दलील दी कि बोर्ड को ऐसा फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की पीठ ने पंजाब सरकार को 1974 के नियमों और बीबीएमबी की शक्तियों को परिभाषित करने वाले अधिनियम की पूरी प्रति पेश करने का आदेश दिया।

पंजाब सरकार की याचिका में 23 अप्रैल, 2025 की बैठक के मिनट्स को चुनौती दी गई है। उस बैठक में बीबीएमबी ने पेयजल की कमी और नहर मरम्मत कार्य का हवाला देते हुए हरियाणा को 8,500 क्यूसेक तक पानी देने का फैसला किया था।

यह फैसला एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा

पंजाब सरकार ने कहा कि यह फैसला एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि रावी-ब्यास जल का बंटवारा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 78 और 79 के तहत ही होता है, किसी बोर्ड के प्रस्ताव से नहीं। बीबीएमबी को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किसी राज्य को उसके निर्धारित हिस्से से ज़्यादा पानी देने का कोई अधिकार नहीं है। दूसरी ओर, बीबीएमबी ने कहा कि बोर्ड ने अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए यह कदम उठाया है।

बीबीएमबी राज्यों के हिस्से में बदलाव नहीं करता, बल्कि मौसम की स्थिति, जल स्तर और सुरक्षा के आधार पर भाखड़ा और पौंग बांधों से पानी छोड़ने को नियंत्रित करता है। अप्रैल का नोट केवल प्रारंभिक था और पंजाब और हरियाणा आपसी सहमति से इसे तय कर सकते थे।

तकनीकी कारणों से जलस्तर कम करने की ज़रूरत

अदालत ने 23 और 24 अप्रैल को हुई बैठकों के विवरण का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि हरियाणा अतिरिक्त आपूर्ति पर ज़ोर दे रहा था, जबकि पंजाब ने स्पष्ट रूप से कहा था कि 4,000 क्यूसेक से ज़्यादा पानी नहीं दिया जाना चाहिए। बीबीएमबी अध्यक्ष ने तकनीकी कारणों से जलस्तर कम करने की ज़रूरत बताई और कहा कि दोनों राज्य आपसी बातचीत से फ़ैसला ले सकते हैं।

बीबीएमबी के वकील ने दलील दी कि बोर्ड का अधिकार और ज़िम्मेदारी मौसम, गर्मी आदि के अनुसार मासिक जलापूर्ति को नियमित करना है। इससे राज्यों के कुल हिस्से में कोई बदलाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ़ एक महीने के लिए 8,500 क्यूसेक पानी के बंटवारे का था, लेकिन जब समय पर पानी नहीं छोड़ा गया, तो सीज़न में बाढ़ की स्थिति और बिगड़ गई। सुनवाई के दौरान पीठ ने पंजाब से बार-बार पूछा कि क्या 1974 के नियमों में केंद्र सरकार से अपील करने का विकल्प है? अगर आप बीबीएमबी के प्रस्ताव से असहमत हैं, तो केंद्र सरकार से शिकायत क्यों नहीं करते?

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