March 28, 2026

गमाडा द्वारा बिल्डर को बड़ी आर्थिक राहत और मंजूरी देने पर सरकार सख्त

गमाडा द्वारा बिल्डर को बड़ी आर्थिक राहत...

चंडीगढ़, 28 मार्च : पंजाब के वित्त विभाग ने गमाडा द्वारा मोहाली के एक निजी बिल्डर को करीब 40 करोड़ रुपये की राहत देने की प्रक्रिया और मंजूरी के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विभाग ने कहा कि इस फैसले में अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया सही नहीं थी और नियमों की अनदेखी की गई है। मोहाली के सेक्टर-62 में फूड कोर्ट विकसित करने के लिए वर्ष 2015 में 1.13 एकड़ की प्रमुख साइट एक बिल्डर को नीलामी के जरिए 32.50 करोड़ रुपये की आरक्षित कीमत पर अलॉट की गई थी।

बिल्डर ने कुल राशि का 20 प्रतिशत और 9.87 करोड़ रुपये की पहली किस्त जमा करवाई, लेकिन इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

जुर्माना और ब्याज माफ करने पर विवाद

गमाडा द्वारा संबंधित बिल्डर का जुर्माना और ब्याज माफ कर दिया गया, जिस पर अब वित्त विभाग ने आपत्ति जताई है। विभाग का कहना है कि इतने बड़े वित्तीय फैसले सीधे अथॉरिटी मीटिंग में पास नहीं किए जा सकते।

10 साल से लंबित प्रोजेक्ट पर सवाल

वित्त विभाग ने यह भी सवाल उठाया कि पिछले एक दशक से लंबित इस प्रोजेक्ट पर निर्णय लेने का अधिकार निचले स्तर के अधिकारियों के पास था, फिर भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। साथ ही यह भी पूछा गया कि इस मामले को अचानक अथॉरिटी की बैठक में अंतिम समय पर एजेंडा के रूप में क्यों पेश किया गया।

विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों को संबंधित कानूनी अधिकारियों के माध्यम से ही निपटाया जाए और अथॉरिटी के सामने रखने से पहले सभी नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए। यह भी कहा गया कि किसी भी मामले का एजेंडा कम से कम एक सप्ताह पहले प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

कानून की धाराओं का दिया हवाला

यह मामला मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई गमाडा अथॉरिटी की 34वीं बैठक में उठाया गया। बताया जा रहा है कि यह फूड कोर्ट साइट का मामला वर्ष 2016 से लंबित है और इस दौरान एस्टेट अधिकारी द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वित्त विभाग ने पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1995 की धाराओं 44 और 45 का हवाला देते हुए एस्टेट अधिकारी और मुख्य प्रशासक के अधिकारों की जानकारी भी दी है। विभाग ने कहा कि अधिकारियों को अपने अधिकारों का सही उपयोग करना चाहिए था।

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