मोहाली, 20 मार्च : केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेशनल एग्री-फूड एंड बायोमैन्युफैक्चरिंग इंस्टीट्यूट में 42 करोड़ रुपये की बायोफाउंड्री का शिलान्यास किया। यह जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत भारत का पहला समर्पित बायोफाउंड्री केंद्र होगा। मंत्री ने कहा कि भारत स्मार्ट प्रोटीन और बायो-आधारित उत्पादों के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। यह पहल बढ़ती वैश्विक प्रोटीन मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान देने में मदद करेगी।
लैब से उद्योग तक की दूरी होगी कम
डॉ. सिंह ने बताया कि यह बायोफाउंड्री लैब रिसर्च और औद्योगिक उपयोग के बीच की दूरी को कम करेगी। इससे न्यूट्रिशनल बायोएक्टिव्स, बायो-इनपुट्स और फूड टेक्नोलॉजी में नवाचार को गति मिलेगी। मोहाली में बनने वाली यह सुविधा एग्री-फूड इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करेगी और एडवांस्ड फर्मेंटेशन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देगी। यह केंद्र कृषि, खाद्य और पोषण सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।
आधुनिक तकनीकों से लैस होगी बायोफाउंड्री
इस बायोफाउंड्री में बड़े फर्मेंटर्स, अपस्ट्रीम-डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग सिस्टम और हाई-थ्रूपुट एक्सपेरिमेंटल प्लेटफॉर्म होंगे। यह स्टार्टअप्स और उद्योग को स्केल-अप, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और प्री-कमर्शियलाइजेशन में मदद करेगा। यह केंद्र युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट हब के रूप में भी काम करेगा। साथ ही स्टार्टअप्स को नई तकनीकों को विकसित करने और बाजार तक पहुंचाने में सहयोग मिलेगा।
मंत्री ने कहा कि माइक्रोबियल फर्मेंटेशन, प्लांट बायोटेक्नोलॉजी और सिंथेटिक बायोलॉजी के जरिए विकसित स्मार्ट प्रोटीन भविष्य के भोजन का टिकाऊ विकल्प है।
BioE3 नीति से मिल रहा समर्थन
डॉ. सिंह ने बताया कि भारत की बायोइकोनॉमी को BioE3 नीति जैसी नीतियों का समर्थन मिल रहा है, जो रोजगार, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थानों, उद्योग, स्टार्टअप्स और नीति निर्माताओं के सहयोग से ही बायोटेक्नोलॉजी में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
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