कुरुक्षेत्र, 29 जनवरी : प्रसिद्ध किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने चुनावी राजनीति को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। कुरुक्षेत्र में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह भविष्य में कभी भी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने अपने फैसले को दोहराते हुए प्रतीकात्मक रूप से अपने कान पकड़कर कहा कि अब उनकी चुनावी राजनीति में उतरने की कोई इच्छा नहीं बची है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया विधानसभा चुनावों के अनुभव ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर किया है।
चुनावी व्यवस्था और जनता पर तीखा हमला
चढ़ूनी ने मौजूदा चुनावी प्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आज के हालात में ईमानदारी से काम करने वाले व्यक्ति के लिए राजनीति में कोई जगह नहीं है।
उन्होंने कहा, “जितने भ्रष्ट नेता हैं, उतनी ही भ्रष्ट जनता भी होती जा रही है।” उनका आरोप है कि लोग शराब, पैसे और निजी स्वार्थों के लिए वोट करते हैं, जिससे सत्ता में केवल भ्रष्ट और धनबल वाले लोग ही पहुंचते हैं।
6000 एकड़ जमीन छुड़ाने का दावा
अपने दावों को मजबूत करते हुए चढ़ूनी ने बताया कि उन्होंने 12 गांवों की लगभग 6000 एकड़ जमीन, जो पिछले 60 वर्षों से सरकारी कब्जे में थी, उसे छुड़वाने का काम किया। इसके बावजूद, उन्हीं क्षेत्रों से उन्हें अपेक्षित जनसमर्थन और वोट नहीं मिले। उन्होंने कहा कि जनता काम करने वाले व्यक्ति को चुनने के बजाय उन लोगों को चुनती है, जो सत्ता का दुरुपयोग कर पैसा बनाते हैं।
कांग्रेस-भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं को किया खारिज
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कांग्रेस या भाजपा में शामिल होने की अटकलों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि चुनावों के समय ऐसी अफवाहें केवल मनोरंजन के लिए फैलाई जाती हैं और उनका किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। किसान नेता के इस रुख ने हरियाणा की राजनीति और किसान आंदोलनों के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चढ़ूनी का यह फैसला किसान आंदोलन और राज्य की सियासत पर क्या असर डालता है।
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