चंडीगढ़, 11 सितम्बर : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भारतीय नौसेना भर्ती मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी भर्ती एजेंसी को केवल ‘अयोग्य’ लिखकर किसी उम्मीदवार को खारिज करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता नहीं बरती जाती और ठोस कारण नहीं बताए जाते, किसी भी उम्मीदवार की उम्मीदवारी को खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता।
बिना कारण आयोगय घोषित किया था
इसी आधार पर कोर्ट ने भारतीय नौसेना को युवक को 2.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। दीपक सिंह ने वर्ष 2018 में भारतीय नौसेना में सीनियर सेकेंडरी रिक्रूट के पद के लिए आवेदन किया था। लिखित परीक्षा पास करने के बाद वह शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए उपस्थित हुए।
इस परीक्षा में उन्हें सात मिनट में 1.6 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी थी, 20 स्क्वैट्स और 10 पुश-अप्स करने थे। दीपक का कहना है कि उन्होंने दौड़ और स्क्वैट्स सफलतापूर्वक पूरे कर लिए थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने पुश-अप्स शुरू किए, वहां मौजूद एक परीक्षक ने अचानक बिना कोई कारण बताए उन्हें मैदान से बाहर जाने को कह दिया।
याचिकाकर्ता ने तुरंत लिखित में स्पष्टीकरण माँगा और बाद में कई बार पत्राचार किया, लेकिन किसी भी स्तर पर कोई जवाब नहीं मिला। नतीजतन, उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। नौसेना ने अदालत में दलील दी कि मानक नियमों के अनुसार उम्मीदवार को “अयोग्य” घोषित किया गया था और 16 अन्य उम्मीदवार भी अनुत्तीर्ण हो गए थे। लेकिन नौसेना परिणाम पत्रक या अपने जवाब में यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि दीपक को किस आधार पर अनुत्तीर्ण घोषित किया गया।
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