मोहाली, 22 फरवरी : पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने GMADA द्वारा किसानों को प्राथमिक स्थानों पर प्लॉट का लाभ न देने की नीति पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई मोहाली-पिंड दुराली के हरजीत सिंह और 111 अन्य किसानों की याचिका पर की गई, जिसे वकील नरेश कौशल और नितिन कौशल के माध्यम से दायर किया गया था।हाईकोर्ट के जज अनु्पइंदर सिंह ग्रेवाल और दीपक मंचंदा की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार और GMADA से जवाब मांगा है। अदालत ने 11 मार्च तक इस नीति के तहत किसी भी एलॉटमेंट को रोक दिया है।
किसानों की मुख्य दलील
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि धारा डी बेहद पक्षपाती है और GMADA को मनमानी का अधिकार देती है। इसके तहत किसानों को लैंड पूलिंग के दौरान प्रमुख लोकेशन (प्राथमिक स्थानों) पर वाणिज्यिक और आवासीय प्लॉट देने से वंचित रखा गया है। किसानों का कहना है कि उन्हें मुख्य सड़कों के पास और कॉर्नर प्लॉट्स में हिस्सा मिलना चाहिए और इसके लिए उनका बकायदा ड्रॉ तैयार किया जाना चाहिए।
अदालत का निर्देश
अदालत ने स्पष्ट किया कि जमीन के मालिकों को ऐसे लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। पंजाब सरकार और GMADA के वकीलों ने इस मौके पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।
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