बालासोर, 21 अगस्त : भारत ने आज बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित अब्दुल कलाम द्वीप से अपनी सबसे शक्तिशाली अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल को बंगाल की खाड़ी के तट से हवा में दागा गया। यह मिसाइल हिंद महासागर में अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में सफल रही।
यह भारत की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है, जिसे भारत का ब्रह्मास्त्र कहा जाता है। MIRV तकनीक से युक्त अग्नि 5 मिसाइल कई सौ किलोमीटर में फैले तीन लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर उन्हें पलक झपकते ही नष्ट कर सकती है। यह मिसाइल 29.401 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने में सक्षम है। भारत ने आज, बुधवार, 20 अगस्त 2025 को अग्नि 5 का सफल परीक्षण किया। इससे पहले, इसी साल 11 मार्च को इस मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था।
भारत महाशक्तियों की सूची में शामिल
अग्नि-5 में सेंसर लगे हैं जो इसे बिना किसी चूक के अपने लक्ष्य तक पहुँचने में सक्षम बनाते हैं। भारत के पास अग्नि मिसाइल 1990 से ही है, लेकिन समय के साथ इसके नए और आधुनिक संस्करण भी बनाए गए हैं। अग्नि-5 एक पूर्णतः सक्षम मिसाइल है जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, अभी तक केवल रूस, चीन, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के पास ही एमआईआरवी तकनीक से लैस मिसाइलें हैं। इस मिसाइल को ज़मीन, समुद्र या पनडुब्बी से दागा जा सकता है।
अग्नि 5 सबसे तेज और सबसे खतरनाक है
भारत के पास वर्तमान में 700 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली अग्नि 1 मिसाइल, 2000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली अग्नि 2 मिसाइल, 3000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली अग्नि 3 मिसाइल तथा 3500 से 4000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली अग्नि 4 मिसाइल हैं।
अग्नि 5 को भारत की सबसे शक्तिशाली, सबसे ताकतवर और सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अग्नि 5 के ज़रिए भारत चीन से आने वाली चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है। अगर आज यह कहा जाए कि भारत मिसाइलों के क्षेत्र में दुनिया के सामने अपनी धाक जमा रहा है, तो शायद यह सच नहीं होगा। आज के परीक्षण के मौके पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों की एक टीम मौजूद थी।
भारत देश की सुरक्षा में व्यस्त है
यहाँ यह बताना ज़रूरी है कि भारत अपनी सभी मिसाइलों का परीक्षण बेहद गोपनीय तरीके से कर रहा है। भारत अपनी सभी मिसाइलों, चाहे वे बैलिस्टिक श्रृंखला की मिसाइलें हों या क्रूज़ श्रृंखला की, के परीक्षण की तारीख या समय की पहले से घोषणा नहीं कर रहा है। आज भारत मिसाइलों के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाने में पूरी तरह सफल हो चुका है। सबसे खास बात यह है कि मिसाइलों के क्षेत्र में भारत अब दुनिया के किसी अन्य देश की तकनीक या वैज्ञानिकों पर निर्भर नहीं है।
भारत जिन मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है, वे सभी पूरी तरह से स्वदेशी ज्ञान और कौशल से विकसित की गई हैं। इनका निर्माण भारत में ही हो रहा है और इनका परीक्षण भी भारत द्वारा ही किया जा रहा है। भारत ने 2007 में अग्नि-5 के विकास की घोषणा की थी और अग्नि-5 का पहला सफल परीक्षण 2012 में अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया था।
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