February 4, 2026

11 वर्षों में भारत की आर्थिक नींव मजबूत हुई: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

11 वर्षों में भारत की आर्थिक नींव मजबूत...

नई दिल्ली, 29 जनवरी : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की आर्थिक नींव काफी मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण महंगाई नियंत्रण में रही है, नागरिकों की आय बढ़ी है और उनकी क्रय शक्ति में भी सुधार हुआ है। वैश्विक संकटों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता अहम

राष्ट्रपति ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार “सुधारों की गाड़ी” पर सवार है और भविष्य की जरूरतों के अनुसार पुराने नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं।

मध्य वर्ग को बड़ी राहत

राष्ट्रपति मुर्मू ने जीएसटी सुधारों और 12 लाख रुपये तक की आय को कर-मुक्त करने के फैसले को मध्य वर्ग के लिए बड़ी राहत बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों से मजदूरों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस और बिरसा मुंडा व सरदार वल्लभभाई पटेल से जुड़े आयोजनों का भी उल्लेख किया।

किसानों की खुशहाली सरकार की प्राथमिकता

कृषि क्षेत्र पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि किसानों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक करीब 4 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में डाले जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में अनाज और बागवानी फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। राष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दुरुपयोग, डीपफेक और गलत सूचना को लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा बताया और इनसे निपटने की जरूरत पर जोर दिया।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में चार और सेमीकंडक्टर यूनिट को मंजूरी दी गई है, जिससे भारत चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति के संबोधन में सरकार की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और प्राथमिकताओं का भी स्पष्ट खाका देखने को मिला।

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