नई दिल्ली, 26 जून — भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच आयात शुल्क को लेकर गहराता मतभेद इस संभावित समझौते की राह में सबसे बड़ी रुकावट बन गया है। 9 जुलाई की तय समयसीमा से पहले समझौता हो पाना अब मुश्किल माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि भारत ऑटो पार्ट्स, स्टील और कुछ प्रमुख कृषि उत्पादों जैसे सोयाबीन, मक्का, गेहूं, इथेनॉल और डेयरी उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ में कटौती करे। अमेरिका का कहना है कि इन उत्पादों पर उच्च शुल्क अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, भारत इन टैरिफों को अपने ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा और घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए आवश्यक मानता है। भारतीय अधिकारियों का साफ कहना है कि वे अपने हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे और किसी भी डील पर हस्ताक्षर तभी होंगे जब देश की प्राथमिकताएं सुरक्षित होंगी।
डोनाल्ड ट्रंप के लिए बढ़ी चुनौती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह स्थिति असहज बन गई है। चीन के साथ पहले ही टैरिफ को लेकर तनाव झेल रहे ट्रंप प्रशासन को अब भारत से भी कड़ा रुख देखने को मिल रहा है। ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं होता है तो अमेरिका भारत के खिलाफ ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ यानी जवाबी शुल्क 9 जुलाई से लागू कर सकता है।
उलट गई उम्मीदें
गौरतलब है कि कुछ समय पहले तक संकेत मिल रहे थे कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर ‘नो टैरिफ’ समझौते के लिए तैयार हो सकता है। लेकिन अब स्थितियाँ बदल चुकी हैं। भारत चाहता है कि अमेरिका अपने मौजूदा टैरिफ, विशेषकर स्टील और ऑटो पार्ट्स पर लगने वाले शुल्क में राहत दे और 9 जुलाई से प्रस्तावित 26% जवाबी शुल्क को भी वापस लिया जाए।
हालांकि, रॉयटर्स को जानकारी देने वाले तीन वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी वार्ताकार अभी तक भारत की इन मांगों पर सहमति जताने को तैयार नहीं हैं।

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