नई दिल्ली, 12 अप्रैल : इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चली लंबी वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। करीब 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने साफ कहा कि कोई खास प्रगति नहीं हुई और दोनों पक्ष बिना समझौते के लौट रहे हैं। इस बीच मिडल ईस्ट में सीज़फायर की स्थिति भी नाजुक बनी हुई है। प्रेस ब्रीफिंग में वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पूरी ईमानदारी के साथ समझौते की कोशिश की, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
अमेरिका की ‘रेड लाइन्स’ स्पष्ट
वेंस ने बताया कि अमेरिका ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ साफ कर दी थीं किन मुद्दों पर समझौता संभव है और किन पर नहीं। इसके बावजूद ईरान ने इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया। जब ईरान के इनकार के कारणों पर सवाल किया गया, तो वेंस ने कहा कि अमेरिका की मुख्य मांग थी कि ईरान स्पष्ट रूप से यह वचन दे कि वह भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता था कि ईरान न केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए, बल्कि ऐसे किसी भी उपकरण या क्षमता को हासिल न करे जिससे वह तेजी से परमाणु हथियार बना सके।
कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला
वेंस के अनुसार, ईरान की ओर से ऐसा कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला कि वह आने वाले वर्षों में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। यही बातचीत टूटने का बड़ा कारण बना। इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि परिणाम चाहे जो भी हो, अमेरिका की स्थिति मजबूत है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने तेहरान को सैन्य रूप से कमजोर कर दिया है और समझौता हो या न हो, इससे अमेरिका को फर्क नहीं पड़ता।
मिडल ईस्ट में तनाव बरकरार
शांति वार्ता के असफल रहने से मिडल ईस्ट में तनाव कम होने की बजाय और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं।

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