नई दिल्ली, 12 अप्रैल : Iran ने अमेरिका और Israel के साथ बढ़ते तनाव के बीच रणनीतिक जलमार्ग Strait of Hormuz पर नियंत्रण कड़ा करने और टोल वसूली की योजना लागू करने का फैसला किया है। इस कदम से वैश्विक समुद्री यातायात और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। ईरान ने संकेत दिया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज़ों पर विभिन्न प्रकार के शुल्क लगाए जाएंगे, जिनमें सुरक्षा, परिवहन और पर्यावरण से जुड़े टैक्स शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज़ों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 20 लाख डॉलर तक का शुल्क लिया जा सकता है।
नया नहीं है टैक्स फार्मुला
अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से टोल वसूलने की प्रक्रिया कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह एक स्थापित प्रथा है जिसका इतिहास विभिन्न देशों में देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, स्वेज़ नहर, जो लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है, एशिया और यूरोप के बीच यात्रा के समय को कम से कम दस दिन घटा देती है। यह जलमार्ग वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 10 प्रतिशत संभालता है, जो इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
इसी तरह, पनामा नहर, जो प्रशांत और अटलांटिक महासागरों को जोड़ती है, विश्व के समुद्री व्यापार का लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सा अपने माध्यम से संचालित करती है। हालांकि यह प्रतिशत अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन इसमें कंटेनर वाले माल, कार, और अनाज जैसे उच्च मूल्य वाले सामग्रियों का आवागमन होता है। अमेरिका में, कंटेनर कार्गो का लगभग 40 प्रतिशत इसी नहर के माध्यम से गुजरता है, जिसकी वार्षिक मूल्य लगभग 270 अरब डॉलर है, जो इस जलमार्ग की आर्थिक महत्ता को दर्शाता है।
मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. लगभग 24 प्रतिशत वैश्विक समुद्री व्यापार इससे होकर गुजरता है. इसमें समुद्र के रास्ते ले जाया जाने वाला कच्चा तेल और 26 प्रतिशत वाहन शामिल हैं। इसी रास्ते पर सिंगापुर स्थित है. वहां दुनिया का दूसरा सबसे व्यस्त कंटेनर बंदरगाह है। तुर्की के जलमार्ग भी महत्वपूर्ण हैं. बोस्फोरस और डार्डानेल्स तुर्की के दो अहम स्ट्रेट हैं. ये काला सागर और भूमध्य सागर के बीच का एकमात्र समुद्री मार्ग हैं।
Donald Trump की तीखी प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। हालांकि ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह उनका संप्रभु अधिकार है और इसे कानूनी रूप देने की प्रक्रिया जारी है। ईरान की इस्लामी सलाहकार परिषद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग ने 17 अप्रैल से इस नीति को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे संकेत मिलता है कि ईरान इस योजना को गंभीरता से लागू करना चाहता है।
यह भी देखें : जना नायगन लीक पर भड़के विजय देवरकोंडा, बोले— मैं भी झेल चुका हूं यह दर्द

More Stories
महिला आरक्षण कानून लागू करने का यह उचित समय है : नरेंद्र मोदी
ईरान ने अमेरिकी शर्तें ठुकराईं, इस्लामाबाद शांति वार्ता बेनतीजा
कटिहार में भीषण सड़क हादसा, बस और पिकअप वैन की टक्कर