नई दिल्ली, 4 मार्च : ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की हमले में मौत के बाद देश में नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मौजूदा हालात में उनके बेटे मुजतबा खामेनेई का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि मुजतबा कभी किसी आधिकारिक सरकारी पद पर नहीं रहे, लेकिन उन्हें अपने पिता का करीबी और पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला माना जाता रहा है। हमले के बाद से वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं और सुरक्षा कारणों से उनके किसी गुप्त स्थान पर होने की चर्चा है।
जंग का चौथा दिन, 1000 से ज्यादा मौतें
ईरान के खिलाफ इज़राइल और अमेरिका की ओर से शुरू की गई सैन्य कार्रवाई चौथे दिन भी जारी है। इस भीषण संघर्ष के चलते वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट देखी गई है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
ईरानी सरकारी एजेंसी ‘फाउंडेशन ऑफ मार्टियर्स एंड वेटरन्स अफेयर्स’ के मुताबिक अब तक कम से कम 1,045 लोगों की मौत हो चुकी है। ये वे लोग हैं जिनकी पहचान हो चुकी है और जिनके अंतिम संस्कार की तैयारी की गई है। हमले में मुजतबा खामेनेई के पिता और पत्नी की भी मौत हो गई, जिससे कट्टरपंथी धड़े और सेना के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है।
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सामने बड़ी चुनौती
ईरान की सर्वोच्च धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स अब नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगी। ऐसे व्यक्ति का चयन किया जा सकता है जो युद्ध जैसे कठिन समय में देश को संभाल सके और सेना के साथ तालमेल बनाए रखे।
हालांकि मुजतबा के सामने चुनौती कम नहीं है। 1979 की ईरानी क्रांति का उद्देश्य वंशवाद और राजशाही का अंत करना था। ऐसे में यदि पिता के बाद पुत्र को सत्ता मिलती है तो इसे परिवारवाद या ‘नई राजशाही’ के रूप में देखा जा सकता है। इसके अलावा उनके धार्मिक कद और अनुभव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कई वरिष्ठ धर्मगुरुओं की तुलना में उन्हें कम अनुभवी माना जाता है।
परमाणु कार्यक्रम की कमान
जो भी ईरान का अगला सुप्रीम लीडर बनेगा, उसके पास देश की सेना और परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण नियंत्रण होगा। मौजूदा हालात में ईरान एक बड़े युद्ध में उलझा हुआ है और इज़राइल व अमेरिका के हमले जारी हैं। नए नेता के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परमाणु कार्यक्रम को लेकर रणनीतिक फैसले लेना होगी।
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