नई दिल्ली, 25 मार्च: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अचानक बढ़कर 4,550 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता की उम्मीद ने निवेशकों को फिर से सोने की ओर आकर्षित किया है। इससे पहले कई दिनों तक बाजार में सोने की भारी बिकवाली देखी गई थी।
जंग के बीच शांति की खबर पर क्यों बढ़े दाम?
आमतौर पर युद्ध के दौरान शांति की खबर आने पर सोने की कीमतों में गिरावट आती है, लेकिन इस बार उल्टा ट्रेंड देखने को मिला है। इसके पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान ने ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक सकारात्मक कदम उठाया है, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद बनी है लगातार 9 दिनों की गिरावट के बाद जिन निवेशकों ने सोने के खिलाफ दांव लगाया था, वे अब अपनी पोजीशन कवर कर रहे हैं, जिससे कीमतों में तेजी आई। अमेरिकी डॉलर के कमजोर रुख ने भी सोने को मजबूती दी है।
क्या सोना अब भी ‘सेफ हेवन’ है?
जनवरी 2026 में अपने उच्च स्तर 5,626 डॉलर प्रति औंस से सोना करीब 20% नीचे आ चुका है। ऐसे में निवेशकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या सोना अब भी सुरक्षित निवेश बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- लिक्विडिटी फैक्टर: संकट के समय निवेशक नकदी जुटाने के लिए सोना बेचते हैं, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ता है।
- बदलता पैटर्न: भूराजनीतिक तनाव आमतौर पर सोने को सपोर्ट करता है, लेकिन मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक (मैक्रो) कारक अधिक प्रभावी हो गए हैं।
भारत में सोने की स्थिति
भारत में सोने का कुल भंडार लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर आंका जाता है। यहां सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संपत्ति और जरूरत के समय नकदी का मजबूत साधन भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अल्पकाल में सोने में अस्थिरता और जोखिम नजर आए, लेकिन लंबी अवधि में यह महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा बना रहेगा।

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