नई दिल्ली, 28 मार्च : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव उस समय और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया, जब प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इस हमले में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए और अमेरिकी सैन्य उपकरणों को भारी नुकसान पहुंचा।
हमले में KC-135 स्ट्रैटोटैंकर जैसे महत्वपूर्ण विमान भी क्षतिग्रस्त हुए, जो हवा में ईंधन भरने के लिए इस्तेमाल होते हैं। इस घटना को अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम की बड़ी विफलताओं में से एक माना जा रहा है।
क्या है E-3 सेंट्री?
E-3 सेंट्री एक एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) है। इसे अक्सर “आसमान की आंख” कहा जाता है।
- यह हवा में उड़ते हुए दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन की निगरानी करता है
- लगभग 250 मील (करीब 400 किमी) तक के क्षेत्र को स्कैन कर सकता है
- रियल-टाइम में जानकारी देकर लड़ाकू विमानों और रक्षा सिस्टम को निर्देश देता है
- युद्ध के दौरान कमांड और कंट्रोल सेंटर की तरह काम करता है
फिर कैसे फेल हुआ सिस्टम?
ईरान ने संभवतः एक साथ कई मिसाइलों और ड्रोन का प्रक्षेपण किया, जिससे सुरक्षा प्रणालियों पर दबाव बढ़ गया और कुछ लक्ष्यों को बच निकलने का अवसर मिला। कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ये ड्रोन और मिसाइलें रडार की पकड़ से बचने में सक्षम होते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना अत्यंत कठिन हो जाता है। इसके अलावा, जैमिंग या सिग्नल इंटरफेरेंस के माध्यम से रडार सिस्टम को भ्रमित किया जा सकता है, जिससे उनकी प्रभावशीलता और भी कम हो जाती है। इस संदर्भ में, E-3 सेंट्री को अब अपेक्षाकृत पुराना माना जा रहा है, क्योंकि बदलती तकनीक और आधुनिक खतरों के सामने इसकी क्षमताओं की सीमाएं स्पष्ट हो रही हैं। यह स्थिति सुरक्षा रणनीतियों में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है, ताकि नए खतरों का सामना किया जा सके।
आगे क्या योजना है?
अमेरिका अब E-3 सेंट्री के स्थान पर एक नए और अधिक उन्नत प्रणाली, E-7 वेजटेल, को अपनाने की योजना बना रहा है। यह नया सिस्टम आधुनिक सुरक्षा खतरों का सामना करने में अधिक सक्षम माना जाता है। E-7 वेजटेल की तकनीक और क्षमताएं इसे जटिल और विकसित होते हुए युद्धक्षेत्र में प्रभावी बनाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। यह प्रणाली न केवल निगरानी और पहचान में सुधार करती है, बल्कि यह डेटा संग्रहण और विश्लेषण में भी अत्याधुनिक है, जिससे सैन्य बलों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है। इस बदलाव का उद्देश्य अमेरिका की वायु शक्ति को और अधिक मजबूत बनाना है, ताकि वह वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सके।

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