February 5, 2026

जमात से अमेरिका की नज़दीकी, बांग्लादेश की राजनीति में हलचल

जमात से अमेरिका की नज़दीकी...

नई दिल्ली, 23 जनवरी : लंबे समय से जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश अब फरवरी 2026 में आम चुनाव की तैयारी कर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद देश की राजनीति में तेज़ बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका बांग्लादेश की कट्टर इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी से रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जिस पर शेख हसीना के कार्यकाल में प्रतिबंध लगाया गया था।

इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत ने 2019 में कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी को गैर-कानूनी संगठन घोषित किया था, जिसे 2024 में दोहराया गया।इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विशेषज्ञ थॉमस कीन के अनुसार, यदि जमात सत्ता में आती है तो भारत-बांग्लादेश संबंधों को संभालना BNP सरकार की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और जमात-ए-इस्लामी की बढ़ती नज़दीकियां भारत-अमेरिका संबंधों में भी तनाव पैदा कर सकती हैं। पहले से ही दोनों देशों के बीच अमेरिकी टैरिफ, भारत-पाकिस्तान तनाव और रूस से तेल खरीद को लेकर मतभेद मौजूद हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट का दावा

वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ढाका में तैनात अमेरिकी राजनयिकों ने संकेत दिए हैं कि वे जमात-ए-इस्लामी के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। यह वही पार्टी है जिस पर बांग्लादेश में कई बार प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1 दिसंबर को महिला बांग्लादेशी पत्रकारों के साथ हुई एक बंद कमरे की बैठक में एक अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि देश तेजी से अधिक इस्लामी होता जा रहा है और आगामी चुनावों में जमात-ए-इस्लामी का प्रदर्शन अब तक का सबसे बेहतर हो सकता है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, राजनयिक ने कहा—

“हम चाहते हैं कि वे हमारे दोस्त बनें।”
साथ ही पत्रकारों से जमात के छात्र संगठन के सदस्यों को कार्यक्रमों में आमंत्रित करने की अपील भी की गई।

अमेरिका की चेतावनी और सफाई

अमेरिकी राजनयिक ने यह भी कहा कि अगर जमात सत्ता में आकर शरीया कानून को सख्ती से लागू करती है, तो अमेरिका अगले ही दिन उस पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है। हालांकि, ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता मोनिका शिया ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह बातचीत अनौपचारिक और ऑफ-द-रिकॉर्ड थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी एक पार्टी का समर्थन नहीं करता और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के साथ काम करेगा।

शेख हसीना के दौर में प्रतिबंध

जमात-ए-इस्लामी की स्थापना 1941 में सैयद अबुल आला मौदूदी ने की थी। पार्टी ने 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी का विरोध किया और पाकिस्तान का समर्थन किया था। 1971 के युद्ध के दौरान जमात के कई नेताओं पर पाकिस्तानी समर्थक अर्धसैनिक संगठनों के साथ मिलकर नागरिकों की हत्या में शामिल होने के आरोप लगे थे।b 2009 में शेख हसीना के सत्ता में लौटने के बाद जमात के नेताओं पर युद्ध अपराधों के मुकदमे चले और पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे वह राजनीतिक रूप से हाशिए पर चली गई।