चंडीगढ़, 5 जून : हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष सावन का महीना 11 जुलाई से प्रारंभ होकर 9 अगस्त तक चलेगा। शिव पुराण में भी सावन माह के महत्व को विस्तार से बताया गया है, जिसमें इस महीने की विशेषताओं और धार्मिक अनुष्ठानों का वर्णन किया गया है। इस बार सावन में चार सोमवार का व्रत रखा जाएगा, जो भक्तों के लिए एक विशेष अवसर है। यह समय शिव की आराधना और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का होता है, जिससे भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
व्रत और आसान पूजन विधी
सावन का महीना शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस महीने में भक्तों का विश्वास होता है कि जो भी वे महादेव से मांगते हैं, वह अवश्य पूरा होता है। इस दौरान, भक्त विशेष रूप से सोमवार के दिन व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। इसके साथ ही, वे बेलपत्र, दूध, दही और अन्य सामग्री से भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। यह समय न केवल भक्ति का होता है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति का भी होता है।
सावन सोमवार का महत्तव
सावन सोमवार का विशेष महत्व हिंदू धर्म में अत्यधिक है। यह दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए समर्पित होता है, और भक्त पूरे वर्ष इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस दिन जलाभिषेक करने के साथ-साथ, भक्त अपनी इच्छाओं और मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि यदि अविवाहित लडक़े-लड़कियां सावन के सोमवार का व्रत करते हैं, तो उनकी शादी में सफलता मिलती है। इस प्रकार, सावन का महीना न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ पर भी एक मार्गदर्शक का कार्य करता है।
शिव की पूजा कैसे करें?
सावन का पूरा महीना शिव पूजा के लिए शुभ माना जाता है। वैसे तो भक्त पूरे महीने शिव की पूजा करते हैं और जलाभिषेक करते हैं, लेकिन सावन का सोमवार विशेष माना जाता है। इस दिन शिव पर जलाभिषेक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर साफ कपड़े पहनें, दूध, दही, घी, केसर, भांग, धतूरा, बेलपत्र, चंदन लेकर भगवान का जलाभिषेक करने के लिए मंदिर जाएं और शिव को अर्पित करें। शिव और पार्वती को कील से पवित्र बंधन में बांधें। धूप-दीप जलाएं और शिव के सामने अपनी मनचाही कामना रखें। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई कामना शिव अवश्य पूरी करते हैं।
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