नई दिल्ली, 1 जनवरी : राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी बनाने और अपने वफादार ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के प्रयास में, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने नए साल की शुरुआत में प्रमुख नीतिगत सुधारों की घोषणा की है। इन सुधारों से अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) को स्वतंत्र पेंशन कोष स्थापित करने और पेंशन परिसंपत्तियों का स्वतंत्र रूप से प्रबंधन करने की अनुमति मिलती है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और पेंशन क्षेत्र में नई सोच आएगी, जिससे ग्राहकों को लाभ होगा।
नए सुधारों से ग्राहकों को बेहतर लाभ मिलने की संभावना बढ़ने का दावा किया जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, पीएफआरडीए बोर्ड ने इस ढांचे को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिससे मौजूदा नियामक बाधाएं दूर हो जाएंगी।
बैंकों को स्वतंत्र पेंशन कोष स्थापित करने की अनुमति दी गई
नए नियमों के तहत, बैंकों को पेंशन फंड प्रायोजक बनने की अनुमति तभी दी जाएगी जब वे निवल संपत्ति, बाजार पूंजीकरण और आरबीआई के विवेकपूर्ण मानदंडों पर आधारित पात्रता मानदंडों को पूरा करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल आर्थिक रूप से मजबूत और मूलभूत रूप से सुदृढ़ बैंक ही इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगे। एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड में भी नई नियुक्तियां की गई हैं।
एसबीआई के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि यूटीआई एएमसी की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष स्वाति अनिल कुलकर्णी और सह-संस्थापक और प्रमुख (डिजिटल इंडिया फाउंडेशन) डॉ. अरविंद गुप्ता महान्यायिक न्यासी होंगे।
निवेश प्रबंधन शुल्क के लिए नई स्लैब-आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी
यह कदम बाजार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है और इससे कॉरपोरेट सेक्टर, रिटेल और गिग इकोनॉमी में एनपीएस के विस्तार में मदद मिलेगी। इससे अनौपचारिक क्षेत्र और युवाओं के बीच एनपीएस को लोकप्रिय बनाने में भी मदद मिलेगी। पीएफआरडीए का कहना है कि इन सुधारों से एनपीएस अधिक प्रतिस्पर्धी, सुशासित और लचीला बनेगा, जिससे ग्राहकों को बेहतर सेवानिवृत्ति परिणाम और वृद्धावस्था में मजबूत आय सुरक्षा मिलेगी।

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