मोहाली, 4 जनवरी : पंजाब का मोहाली शहर अब तेजी से पंजाब पुलिस के अनौपचारिक हेडक्वार्टर के रूप में उभर रहा है। राज्य स्तर के लगभग सभी प्रमुख पुलिस दफ्तरों के मोहाली में स्थापित होने से पूरे पंजाब के पुलिस ऑपरेशनों की कमान अब इसी शहर से संचालित की जा रही है। पंजाब पुलिस के ‘विजन 2026’ के तहत मोहाली में अत्याधुनिक तकनीक से लैस स्टेट लेवल कंट्रोल एंड कमांड सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है।
इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर – सेक्टर 77
राज्य की सुरक्षा से जुड़ी गुप्त सूचनाओं को एकत्र करना और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों की निगरानी करना। ऑनलाइन ठगी, डेटा चोरी और सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों की तकनीकी जांच। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर रोक और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई। अपराध स्थल से मिले सबूतों जैसे डीएनए, फिंगरप्रिंट आदि की वैज्ञानिक जांच। पूरे पंजाब में पुलिस कर्मचारियों के लिए रिहायशी क्वार्टर और थानों की इमारतों का निर्माण।
प्रदेशभर के अपराधियों का डेटाबेस तैयार करना और रिकॉर्ड संधारण। विदेशों में रहने वाले पंजाबियों की जमीन और पारिवारिक विवादों से जुड़ी शिकायतों का निपटारा।
विशेष तकनीकी यूनिट और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स
इनके अलावा मोहाली में एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स का मुख्य केंद्र भी स्थापित है, जो राज्य से गैंगस्टर संस्कृति को खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है। सेक्टर 89 में बन रहा नया कमांड सेंटर अत्याधुनिक सीसीटीवी निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए हर पुलिस वाहन की लोकेशन पर नजर रखेगा। सूत्रों के अनुसार सरकार 52 करोड़ रुपये की लागत से डायल 112 का स्टेट कंट्रोल रूम मोहाली के सेक्टर 89 में तैयार कर रही है। यहां से पूरे पंजाब की इमरजेंसी कॉल्स को मॉनिटर और कंट्रोल किया जाएगा।
इसका उद्देश्य पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम 12 मिनट से घटाकर 7–8 मिनट तक लाना है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोहाली की केंद्रीय लोकेशन, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण इन यूनिट्स को यहां शिफ्ट किया गया है। चंडीगढ़ से सटा होने के कारण राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के साथ समन्वय भी आसान हो रहा है।
जल्द बनेगा ‘पुलिस भवन’
सेक्टर 66 में करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से ‘पुलिस भवन’ का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो भविष्य में पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली का नया केंद्र होगा। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि सभी प्रमुख दफ्तर एक ही स्थान पर होने से प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है, लेकिन पुलिस विभाग का दावा है कि इससे अपराध नियंत्रण और विभागीय तालमेल पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा।
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