नई दिल्ली, 17 फरवरी : बांग्लादेश में लोकतांत्रिक स्थिति बहाल करने और कमजोर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कथित विफलता के आरोपों के बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मुहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में तीखे बयान दिए। उनके संबोधन को भारत की ओर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। बताया जाता है कि Sheikh Hasina के तख्तापलट के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार की अगुवाई की।
उनके कार्यकाल के दौरान देश में अस्थिरता और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे। अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर भी उनकी सरकार आलोचनाओं के घेरे में रही।
‘बांग्लादेश अब किसी के आदेश नहीं मानता’
अपने भाषण में यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश ने अपनी विदेश नीति में संप्रभुता, सम्मान और स्वतंत्रता फिर से हासिल कर ली है और अब वह “दूसरों के आदेशों का पालन नहीं करता।” इस बयान को भारत की ओर इशारा माना जा रहा है, जिसने वर्षों तक बांग्लादेश को विभिन्न मोर्चों पर समर्थन दिया है। यूनुस ने भविष्य में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की बात करते हुए नेपाल, भूटान और ‘सात बहनों’ का उल्लेख किया। ‘सात बहनें’ आमतौर पर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए प्रयुक्त शब्द है।
उन्होंने कहा, “हमारा खुला समुद्र केवल सीमाएं नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रवेश द्वार हैं। नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स के साथ इस क्षेत्र में अपार आर्थिक संभावनाएं हैं। आर्थिक जोन, व्यापार समझौते और ड्यूटी-फ्री बाजार पहुंच हमें वैश्विक विनिर्माण केंद्र बना सकती है।”
नई दिल्ली में बढ़ी हलचल
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान नई दिल्ली को असहज कर सकते हैं। भारत ने अपने उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए बांग्लादेश के माध्यम से कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भारी निवेश किया है। यूनुस के इस बयान के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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