नई दिल्ली, 30 नवम्बर : भारत के ऑटो सेक्टर में इन दिनों एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश की प्रमुख कार कंपनियों (हुंडई, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और जे.एस.डब्ल्यू.एम.जी. मोटर) ने नए ईंधन दक्षता मानदंडों को लेकर सरकार के प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई है। इन कंपनियों का कहना है कि नए मानदंडों में छोटे और हल्के वाहनों को दी गई छूट से केवल एक कंपनी, मारुति सुजुकी, को ही फायदा होगा, जिससे पूरे उद्योग का संतुलन बिगड़ सकता है। यही वजह है कि नए मानदंड लागू होने से पहले ही ऑटो सेक्टर दो गुटों में बंट गया है।
पूरा मामला क्या है?
देश में जल्द ही नए कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE) मानदंड लागू होने वाले हैं। इनमें कारों के औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन लक्ष्य को 113 ग्राम/किमी से घटाकर 91.7 ग्राम/किमी करने का प्रस्ताव है। बड़ी एसयूवी के लिए यह लक्ष्य आसान है, लेकिन छोटे पेट्रोल वाहनों के लिए इसे पूरा करना कहीं ज़्यादा मुश्किल होगा।
इसमें सरकार ने 909 किलोग्राम या उससे कम वज़न वाली, 1200 सीसी तक की इंजन क्षमता वाली और 4 मीटर से कम लंबाई वाली कारों को कुछ राहत देने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का तर्क है कि छोटी कारों में दक्षता बढ़ाने की संभावनाएँ सीमित हैं, इसलिए उन्हें छूट देना ज़रूरी है।
हुंडई और टाटा इतने नाराज क्यों हैं?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, हुंडई, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और जे. एस. डब्ल्यू. एम. जी. मोटर ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि वजन आधारित छूट से सिर्फ एक कंपनी को फायदा होता है। जे. एस. डब्ल्यू. एम. जी. मोटर का दावा है कि 909 किलोग्राम से कम वजन वाली 95 फीसदी कारें सिर्फ मारुति सुजुकी की हैं।
महिंद्रा ने चेतावनी दी है कि इस तरह की विशेष श्रेणी न सिर्फ उद्योग के संतुलन को बिगाड़ेगी, बल्कि देश के सुरक्षित और स्वच्छ कारों के लक्ष्य को भी प्रभावित करेगी। हुंडई ने कहा है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धक्का लग सकता है, क्योंकि दुनिया सख्त उत्सर्जन मानकों की ओर बढ़ रही है। इन कंपनियों का आरोप है कि अचानक ऐसा नियम लाने से भविष्य की तकनीक, निवेश और इलेक्ट्रिक वाहनों की दिशा प्रभावित होगी।
मारुति सुजुकी की स्थिति
मारुति सुजुकी का कहना है कि छोटी कारें बड़ी एसयूवी की तुलना में बहुत कम ईंधन की खपत करती हैं और कम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षा प्रदान करना पर्यावरण और उपभोक्ता दोनों के लिए फायदेमंद है। कंपनी ने बताया कि दुनिया के कई देशों में छोटी कारों को रियायत दी जाती है।
नए नियम पर निर्णय अभी लंबित
नए नियमों को लेकर बढ़ते तनाव ने ऑटो सेक्टर में अविश्वास बढ़ा दिया है। कंपनियों का कहना है कि जब तक नियम स्पष्ट नहीं हो जाते, वे भविष्य की कारों, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए निवेश रणनीति तय नहीं कर पाएँगी।
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