अमृतसर, 16 जनवरी : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज नंगे पांव अरदास करते हुए एक विनम्र सिख के रूप में श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष नतमस्तक हुए। मुख्यमंत्री ने अपना पूरा दिन सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख़्त साहिब को समर्पित किया और सचिवालय में जत्थेदार साहिब के समक्ष पेश होकर अपने पूर्व बयानों को लेकर विस्तार से स्पष्टीकरण दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे श्री अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता में पूर्ण विश्वास रखते हैं और इसके हर निर्णय को सिर-माथे स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पावन संस्था की अथॉरिटी को चुनौती देने या कमजोर करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
जत्थेदार साहिब के आदेशों का पालन
सचिवालय में पेश होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि वे जत्थेदार साहिब के हुक्म पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए हैं। उन्होंने बताया कि जत्थेदार साहिब ने उनका बयान दर्ज कर लिया है और सिंह साहिबानों के साथ विचार-विमर्श के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। श्री अकाल तख़्त साहिब के हर फैसले के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यहाँ पेश होकर उन्हें गहरा सुकून, आंतरिक शांति और संतुष्टि मिली है। उन्होंने दोहराया कि वे हर आदेश का पालन करेंगे।
खुद को पंजाब का सेवक बताया
मुख्यमंत्री ने श्री अकाल तख़्त साहिब और पंजाब सरकार के बीच कथित टकराव को लेकर फैलाए जा रहे कथानक को बेबुनियाद और झूठा बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार केवल पंजाब की तरक्की और लोगों की भलाई के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पंजाब और पंजाबियों की चढ़दी कला के लिए रोज़ाना अरदास करते हैं। उनका सिर हर धार्मिक स्थल के आगे झुकता है और यह असंभव है कि उनका कोई भी कार्य प्रदेश या लोगों के विरुद्ध हो।
हजारों पन्नों की शिकायतें सौंपी
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने लाखों लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए जत्थेदार साहिब को 25,000 से 30,000 पन्नों की शिकायतें सौंपी हैं। ये शिकायतें शिरोमणि कमेटी के कामकाज में कथित अनियमितताओं से जुड़ी हैं और इनकी जाँच की माँग की गई है।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लापता सरूपों की जाँच के लिए गठित एसआईटी पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। इसका उद्देश्य केवल लापता सरूपों का पता लगाना है, ताकि किसी भी प्रकार की दुरुपयोग की संभावना न रहे।
धार्मिक मर्यादा का पूर्ण सम्मान
मुख्यमंत्री ने जत्थेदार साहिब से अनुरोध किया कि शिरोमणि कमेटी को निर्देश दिए जाएँ, ताकि उनके द्वारा प्रकाशित प्रत्येक सरूप को दिया गया विशिष्ट (यूनिक) कोड उपलब्ध कराया जाए। इससे लापता सरूपों का पता लगाने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस और राज्य सरकार पावन सरूपों का पता लगाकर उनकी जानकारी श्री अकाल तख़्त साहिब और शिरोमणि कमेटी को देगी। उन्होंने बताया कि पुलिस को स्पष्ट निर्देश हैं कि जहाँ भी सरूप मिलें, वहाँ धार्मिक स्थलों की इमारतों के भीतर प्रवेश न किया जाए।
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