February 10, 2026

सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बड़ों को भी हो सकते हैं पेट के कीड़े

सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बड़ों को...

नई दिल्ली, 10 फरवरी : आमतौर पर यह माना जाता है कि पेट के कीड़े सिर्फ बच्चों या गंदा खाना खाने वालों की समस्या होते हैं। कई वयस्क यह सोचते हैं कि घर का साफ-सुथरा, पका हुआ खाना खाने से वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन भारत जैसे देश में यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। यहां पेट के कीड़ों का खतरा सिर्फ खाने से नहीं, बल्कि आसपास के वातावरण से भी जुड़ा होता है।

कैसे शरीर में प्रवेश करते हैं पेट के कीड़े

पेट के कीड़े अक्सर आंखों से दिखने वाले कीड़े नहीं होते। इनके अंडे और लार्वा इतने सूक्ष्म होते हैं कि दिखाई नहीं देते। ये अंडे मिट्टी, पानी, सब्जियों, फलों, सतहों और यहां तक कि हाथों के जरिए भी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। एक बार शरीर में जाने के बाद ये महीनों या सालों तक बिना लक्षण के रह सकते हैं और धीरे-धीरे सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं।

डिवॉर्मिंग क्यों है जरूरी

डिवॉर्मिंग का मतलब है पेट के कीड़ों को खत्म करने की प्रक्रिया। ये कीड़े शरीर के जरूरी पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे आयरन, विटामिन-बी12, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर एनीमिया, कमजोरी, थकान, इम्यूनिटी कमजोर होना और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

पेट के कीड़ों के सामान्य लक्षण

पेट के कीड़ों के लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और धीरे-धीरे उभरते हैं, जैसे—

  • बार-बार पेट फूलना या दर्द
  • बिना वजह थकान और कमजोरी
  • भूख कम लगना
  • वजन न बढ़ना
  • एनीमिया (खून की कमी)
  • दस्त या कब्ज
  • गुदा में खुजली
  • बार-बार बीमार पड़ना

साल में कितनी बार डिवॉर्मिंग जरूरी

बच्चों में पेट के कीड़े ज्यादा पाए जाते हैं, इसलिए अधिक जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले बच्चों को साल में दो बार डिवॉर्मिंग की सलाह दी जाती है।
वयस्कों के लिए बिना जरूरत खुद से दवा लेना सही नहीं है। यदि बार-बार पेट की समस्या रहती हो, मिट्टी या पालतू जानवरों के संपर्क में रहना पड़ता हो, या सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल होता हो, तो जांच और डॉक्टर की सलाह के बाद ही डिवॉर्मिंग करानी चाहिए।

क्या डिवॉर्मिंग सुरक्षित है?

डिवॉर्मिंग की दवाएं आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली मांएं, लिवर की बीमारी या गंभीर एनीमिया से पीड़ित लोग बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें। बार-बार खुद से दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है।

सिर्फ साफ खाना क्यों नहीं है काफी

घर का खाना भी तब असुरक्षित हो सकता है, जब सब्जियां और फल ठीक से न धोए गए हों या पानी साफ न हो। खासकर कच्ची और पत्तेदार सब्जियां ज्यादा जोखिम वाली होती हैं, क्योंकि उनमें मिट्टी के कण चिपके रहते हैं। पालतू जानवरों के संपर्क, सार्वजनिक शौचालय का उपयोग, नंगे पैर चलना और हाथों की सही सफाई न होना भी संक्रमण का कारण बन सकता है।

पेट के कीड़े सिर्फ बच्चों की समस्या नहीं हैं। वयस्कों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। सही स्वच्छता, सुरक्षित पानी, अच्छी तरह धुला-पका भोजन और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से डिवॉर्मिंग ही बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।

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