दिल्ली, 26 जून : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में अब पाकिस्तान नहीं पढ़ाया जाएगा। उदाहरण के लिए डीयू पोस्ट ग्रेजुएशन पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से पाकिस्तान और विश्व, समकालीन विश्व में चीन की भूमिका, इस्लाम और अंतरराष्ट्रीय संबंध, पाकिस्तान: राज्य और समाज, धार्मिक राष्ट्रवाद और राजनीतिक हिंसा जैसे अध्याय हटा दिए गए हैं। डीयू स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में इन अध्यायों को सिलेबस से हटाने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही पीजी समाजशास्त्र और भूगोल के सिलेबस से भी कुछ अध्याय हटा दिए गए हैं। यह जानकारी डीयू स्टैंडिंग कमेटी की सदस्य डॉ. मोनामी सिन्हा ने दी है।
अब नये कोर्स पर एक जुलाई को चर्चा होगी
डीयू की स्थायी समिति की सदस्य डॉ. मोनामी सिन्हा ने बताया कि संघ से जुड़े शिक्षक संघ एनडीटीएफ के सदस्यों की आपत्ति के बाद पीजी राजनीति विज्ञान के कोर्स से पाकिस्तान और चीन समेत कुछ अध्यायों को हटा दिया गया है। डॉ. सिन्हा ने बताया कि समिति की बैठक में उन्होंने और कुछ अन्य सदस्यों ने इसका विरोध किया था। उन्होंने बताया कि अब नया कोर्स तैयार किया जाएगा, जिस पर एक जुलाई को होने वाली स्थायी समिति की अगली बैठक में चर्चा होगी।
पाकिस्तान का अध्ययन करना आवश्यक है
डीयू की स्थायी समिति की सदस्य डॉ. मोनामी सिन्हा ने कहा कि पीजी राजनीति विज्ञान के कोर्स से पाकिस्तान को हटाना गलत है, जिसका बैठक में भी विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि बैठक में हमने तर्क दिया कि पाकिस्तान का विस्तार से अध्ययन करना आवश्यक है, क्योंकि यह भारत की सतत विदेश नीति से जुड़ी चुनौतियों में से एक है।
उन्होंने कहा कि हमारे भू-राजनीतिक विरोधियों के बारे में पर्याप्त जानकारी न होने के कारण हम रणनीतिक रूप से नुकसान में हो सकते हैं।
इसी तरह, तेजी से बदलते, बहुध्रुवीय विश्व में चीन का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है, जहां चीन के वैश्विक दक्षिण के कई देशों का नेतृत्व करने की संभावना है। इस वास्तविकता को नजऱअंदाज़ करना अकादमिक रूप से अदूरदर्शिता होगी।

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