वाशिंगटन, 11 मार्च : व्हाइट हाउस ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान के उद्देश्यों को दोहराते हुए कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य तेहरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना, उसकी नौसेना को कमजोर करना और उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पर बोलते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह तय करेंगे कि अभियान के लक्ष्य पूरी तरह पूरे हुए हैं या नहीं और क्या ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण की स्थिति में है।
‘4 से 6 हफ्तों’ की शुरुआती टाइमलाइन
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट ने बताया कि इस ऑपरेशन की शुरुआती समयसीमा चार से छह सप्ताह तय की गई थी। इसका उद्देश्य क्षेत्र में सक्रिय ईरान समर्थित आतंकी प्रॉक्सी संगठनों को भी कमजोर करना है। फरवरी में अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों तथा तेहरान के तेज जवाबी हमलों के बाद यह संघर्ष अब ऐसी जंग में बदल गया है, जिसने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है।
5,000 ठिकानों पर हमले का दावा
व्हाइट हाउस के अनुसार ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा झटका दिया है। अब तक लगभग 5,000 दुश्मन ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इनमें 50 से अधिक ईरानी नौसेना के जहाज और एक बड़ा ड्रोन कैरियर जहाज भी नष्ट किए जाने का दावा किया गया है। लेविट ने बताया कि अमेरिका के रणनीतिक B-2 बॉम्बर्स ने 2,000 पाउंड के पेनिट्रेटर बमों का इस्तेमाल कर जमीन के भीतर गहरी मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाया है।
जमीनी सेना भेजने का विकल्प खुला
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान में जमीनी सेना भेजने की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया है। व्हाइट हाउस का दावा है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान के जवाबी हमलों में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। लेविट के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट देने की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखना है।
होरमुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर जोर
अमेरिका ने कहा कि वह होरमुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। खाड़ी क्षेत्र में चलने वाले तेल टैंकरों के लिए अमेरिका ने ‘पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस’ की पेशकश की है और जरूरत पड़ने पर नौसेना की सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
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