इस्लामाबाद, 3 फरवरी : पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर की आर्ट गैलरी में महान सिख सेनापति सरदार हरि सिंह नलुआ की प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति दे दी है। तीन साल पहले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से उनकी प्रतिमा हटाए जाने के बाद यह कदम पाकिस्तान की ओर से अपनी पुरानी गलती सुधारने के रूप में देखा जा रहा है। दुनियाभर के सिख संगठनों ने इस फैसले को सिख इतिहास और विरासत को मान्यता देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया है। उनका कहना है कि यह कदम उन क्षेत्रों में सिख योगदान के सम्मान की शुरुआत हो सकता है, जो कभी सिख साम्राज्य का हिस्सा थे।
1 फरवरी को हुआ उद्घाटन
इस प्रतिमा का उद्घाटन 1 फरवरी को किया गया। इसकी जानकारी अमेरिका स्थित सिख संगठन के अध्यक्ष गुरिंदर सिंह जोसन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने इसे ऐतिहासिक पल बताते हुए कहा कि इससे सिख इतिहास के प्रति सम्मान का नया अध्याय शुरू हो सकता है। इस परियोजना की रूपरेखा गुरिंदर पाल सिंह जोसन ने तैयार की थी, जबकि प्रतिमा का निर्माण जगदीप सिंह बिलिंग ने कुलवंत सिंह दियोल के नेतृत्व में किया। दुनिया भर की सिख संस्थाओं ने इस पहल की सराहना की है।
कौन थे सरदार हरि सिंह नलुआ
सरदार हरि सिंह नलुआ (1791–1837) महाराजा रणजीत सिंह के अधीन सिख साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली सेनापतियों में से एक थे। उन्होंने खालसा राज की उत्तर-पश्चिमी सीमाओं की रक्षा में अहम भूमिका निभाई और कश्मीर, पेशावर व हजारा के गवर्नर रहे। अफगान आक्रमणों को रोकने और पहली बार सिख साम्राज्य को खैबर दर्रे तक विस्तारित करने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
पहले हटाई गई थी प्रतिमा
गौरतलब है कि करतारपुर कॉरिडोर की स्थापना के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने हरिपुर जिले के सिद्दीकी-ए-अकबर चौक से सरदार हरि सिंह नलुआ की आठ फुट ऊंची प्रतिमा हटा दी थी। शहर के सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट के तहत लगाई गई इस प्रतिमा पर कुछ धार्मिक समूहों ने आपत्ति जताई थी। प्रतिमा हटाने का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला विवाद का विषय बन गया था।
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