अमृतसर, 5 नवम्बर : पाकिस्तान ने श्री गुरु नानक देव जी के गुरुपर्व मनाने के लिए ननकाना साहिब जा रहे हिंदू तीर्थयात्रियों को रोककर हिंदुओं और सिखों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की है। मंगलवार को सिख जत्थे के साथ 12 हिंदू तीर्थयात्री भी जा रहे थे, लेकिन पाकिस्तानी सीमा शुल्क और आव्रजन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें वाघा सीमा पर रोक दिया। अधिकारियों ने कहा कि केवल सिख जत्था ही गुरुपर्व मनाने जाएगा।
हिंदुओं और सिखों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश
हिंदू तीर्थयात्रियों को सिख जत्थे के साथ जाने की अनुमति नहीं है। ऐसा पहली बार हुआ है। इससे पहले, हिंदू और सिख समुदाय के लोग पाकिस्तानी धर्मस्थलों के दर्शन करने जाने वाले जत्थों में एक साथ जाते थे। दरअसल, 4 नवंबर 1942 को अंतरराष्ट्रीय अटारी-वाघा मार्ग के जरिए भारत से पाकिस्तान के लिए तीर्थयात्री रवाना हुए थे, जिनमें 12 हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल थे। इनमें से तीन तीर्थयात्री 60 वर्ष से अधिक आयु के थे।
अमर चंद और उनकी पत्नी की आयु 55 वर्ष है। अमर चंद ने दुखी मन से बताया कि परिवार के सदस्य बहुत खुश थे कि उनकी श्री ननकाना साहिब जाने की इच्छा पूरी हो रही है, लेकिन पाकिस्तान के इस कदम से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। वह और उनके परिवार के छह सदस्य अटारी-वाघा सीमा के जरिए औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पाकिस्तान में दाखिल हुए थे।
कहा सिर्फ सिख ही जाएंगे ननकाना साहिब
उन्हें तीर्थयात्रियों के साथ एक बस में बिठाया गया था और इसके लिए उन्होंने टिकट के तौर पर करीब 95 हजार पाकिस्तानी रुपये भी दिए थे। हालांकि, थोड़ी देर बाद पांच पाकिस्तानी अधिकारी आए और उन्हें बस से उतरने को कहा।
अधिकारियों ने साफ कह दिया कि आप हिंदू हैं, आप सिख जत्थे के साथ नहीं जा सकते। बस टिकट के पैसे भी उन्हें वापस नहीं किए गए। अमर चंद ने बताया कि वे मूल रूप से पाकिस्तान के रहने वाले हैं। वह 1999 में भारत आए और 2010 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सिखों और हिंदुओं को बांटने की कोशिश कर रहा है।
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