January 8, 2026

समझौते लंबित, अगले साल गहरा सकता है राज्य का बिजली संकट

समझौते लंबित, अगले साल गहरा...

चंडीगढ़, 8 नवम्बर : पावरकॉम के डायरेक्टर जनरेशन हरजीत सिंह की बर्खास्तगी और गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट के चीफ इंजीनियर हरीश शर्मा के निलंबन के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है। इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ सकता है क्योंकि राज्य सरकार ने हर साल 800 मेगावाट की दर से बढ़ रही बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सितंबर में हुए तीन समझौतों को मंजूरी नहीं दी है।

इस दौरान सरकार ने बिजली उत्पादन का कोई नया स्रोत विकसित नहीं किया है। हालांकि, मार्च में शाहपुर कंडी डैम का काम पूरा होने से अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद है, लेकिन यह मांग के अनुपात में नहीं होगी।

सरकार का दावा है कि पावरकॉम की इंजीनियरों की समिति और निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित 150 मेगावाट के दो समझौते 5.13 रुपये और 5.14 रुपये प्रति यूनिट की दर से हुए हैं, जो मौजूदा सौर ऊर्जा की दर 3 रुपये प्रति यूनिट से ज़्यादा है। इससे अगले 25 सालों में सरकारी खजाने पर 12,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। हालाँकि, पावरकॉम के इंजीनियरों ने इस दावे को खारिज कर दिया है।

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ टेक्नोक्रेट ने कहा कि ये समझौते महंगे नहीं थे और इनकी तुलना सौर ऊर्जा से नहीं की जा सकती। यह हाइब्रिड बिजली थी, जो दिन में सौर ऊर्जा और रात में पवन व बैटरी से उपलब्ध थी।

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