फगवाड़ा, 22 सितंबर : फगवाड़ा के पलाही रोड स्थित ताज विला, कपूरथला की साइबर सेल की पुलिस टीम द्वारा उजागर किए गए साइबर ठगी केंद्र और मौके से गिरफ्तार किए गए करीब 38 आरोपियों से पुलिस की पूछताछ जारी है। वहीं, बड़ा सवाल यह है कि उक्त साइबर ठगी केंद्र में लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए थे। यह पैसा फगवाड़ा में किसने, कहां से और किसके जरिए पहुंचाया? और जब पंजाब के दोआबा का प्रवेशद्वार माने जाने वाले फगवाड़ा जैसे महत्वपूर्ण शहर में यह सब हो रहा था, तो उस समय खुफिया एजेंसियां कहां सक्रिय थीं?
रोज़ाना 15 से 20 लाख रुपये का लेन-देन कर रहा है
इस मामले को लेकर कपूरथला ज़िले के एसएसपी गौरव तुरा द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा हुआ कि साइबर ठगी करने वाला गिरोह रोज़ाना 15 से 20 लाख रुपये का लेन-देन कर रहा है। यानी औसतन मासिक लेन-देन 4.5 करोड़ रुपये से 6 करोड़ रुपये के बीच है।
सूत्रों के अनुसार, फगवाड़ा में साइबर ठगी का यह अड्डा लंबे समय से चल रहा है। अगर एक साल के दौरान हवाला और बिटकॉइन के ज़रिए पैसों के लेन-देन का आँकड़ा जोड़ें, तो यह रकम 54 से 72 करोड़ रुपये के बीच बैठती है और अगर दो साल का हिसाब लगाएँ, तो यह रकम 100 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा है। ऐसे में, बिटकॉइन और हवाला के ज़रिए करोड़ों रुपये की इतनी बड़ी रकम देश (पंजाब) में कैसे पहुँची?
करोड़ों रुपये आख़िर किसकी जेब में जा रहे थे
लेकिन ये करोड़ों रुपये आख़िर किसकी जेब में जा रहे थे और वो कौन सा ताकतवर आदमी है जिसके संरक्षण में फगवाड़ा को साइबर ठगी का अड्डा और लोकप्रिय टीवी सीरियल “जामताड़ा” का अड्डा बनाया गया? विशेषज्ञों का मानना है कि डार्क वेब के ज़रिए किए गए बिटकॉइन लेनदेन का पता लगाना बेहद मुश्किल है। फगवाड़ा में, चालाक धोखेबाज़ों ने सिर्फ़ बिटकॉइन पर ही ध्यान केंद्रित किया, हवाला के ज़रिए धन को परिवर्तित किया और ज़रूरत पड़ने पर फगवाड़ा भेज दिया।
मामले की जाँच कर रही कपूरथला ज़िला पुलिस का दावा है कि फगवाड़ा स्थित ठगी केंद्र में काम करने वाले गिरोह के कर्मचारियों को औसतन 35,000 से 50,000 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाता था। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर पुलिस ने 38 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यानी उन्हें साइबर ठगी केंद्र से लगभग 10,000 से 12,000 रुपये प्रति माह वेतन मिल रहा था।
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