चंडीगढ़, 19 मार्च: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राजस्थान द्वारा दशकों से इस्तेमाल किए जा रहे पानी के बदले 1.44 लाख करोड़ रुपये के बकाए की वसूली का बड़ा दावा किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्थान सरकार या तो यह बकाया राशि अदा करे या फिर पंजाब का पानी लेना बंद करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले की जड़ वर्ष 1920 के ऐतिहासिक समझौते में है, जिसके तहत बीकानेर रियासत, संयुक्त पंजाब और ब्रिटिश शासन के बीच पानी के उपयोग के लिए भुगतान तय हुआ था। उन्होंने इस समझौते की पुनः समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि हर 25 साल में इसकी समीक्षा होनी थी, लेकिन पिछली सरकारों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
1960 के बाद बंद हुआ भुगतान
भगवंत सिंह मान ने बताया कि वर्ष 1960 तक राजस्थान द्वारा पानी के उपयोग के बदले भुगतान किया जाता था, लेकिन सिंधु जल संधि के बाद यह भुगतान बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद राजस्थान लगातार लगभग 18,000 क्यूसेक पानी लेता रहा है।
मुख्यमंत्री ने राजस्थान सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पानी लेने के लिए वह 1920 के समझौते का सहारा लेती है, लेकिन जब भुगतान की बात आती है तो 1960 की व्यवस्था का हवाला देती है।
पिछली सरकारों पर लापरवाही का आरोप
उन्होंने कहा कि 1960 के नए प्रावधानों में भुगतान का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन पुराने समझौते को भी कभी रद्द नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने पंजाब के हितों की अनदेखी की और इस मुद्दे को कभी गंभीरता से नहीं उठाया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार ने इस मुद्दे के समाधान के लिए राजस्थान सरकार को बैठक के लिए पत्र भी लिखा है, ताकि इस लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान निकाला जा सके।
भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि उनकी सरकार पंजाब के संसाधनों और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और राज्य के हक का एक-एक पैसा वसूलने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

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