फरीदाबाद, 18 नवंबर : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को आयोजित उत्तरी ज़ोनल काउंसिल की 32वीं बैठक में चंडीगढ़, पंजाब विश्वविद्यालय और नदियों के पानी से जुड़े मुद्दों पर पंजाब का मजबूत पक्ष रखते हुए देश में वास्तविक संघीय ढांचे (फेडरल स्ट्रक्चर) को लागू करने की जोरदार वकालत की।
बैठक को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि संविधान ने केंद्र और राज्यों के अधिकार क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है, लेकिन पिछले 75 वर्षों में अधिकारों के केंद्रीकरण की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो संघवाद की भावना के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने दुख जताते हुए कहा कि बार-बार वादे होने के बावजूद चंडीगढ़ पंजाब को नहीं सौंपा गया, जिससे हर पंजाबी के मन में पीड़ा है।
एफसीआई में पंजाब कैडर के अफसरों की नियुक्ति की मांग
मान ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासन में पंजाब–हरियाणा के कर्मचारियों की भर्ती का 60:40 अनुपात बनाए रखने की ज़रूरत पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को प्रशासनिक पदों से बाहर करना दुखद है। शिक्षा, वित्त, स्वास्थ्य और आबकारी जैसे विभागों को यूटी कैडर ‘डैनिक्स’ के हवाले कर दिया गया है, जिससे पंजाब की भूमिका कमजोर हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के अनाज पूल में पंजाब के सबसे बड़े योगदान को देखते हुए एफसीआई (पंजाब) के क्षेत्रीय कार्यालय में पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की परंपरा बरकरार रहनी चाहिए।
नदियों के पानी पर समाधान खोजने का अवसर
मान ने कहा कि सिंधु जल संधि के बदलते हालात में चेनाब नदी को रावी और ब्यास से जोड़ने की संभावना तलाशनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब के पास पहले से मौजूद बांध प्रवाह नियंत्रण में सक्षम हैं और यह परियोजना बिजली उत्पादन व सिंचाई दोनों के लिए लाभकारी हो सकती है।
भाखड़ा और पोंग बांधों के जलस्तर बढ़ाने का कड़ा विरोध
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1988 की भीषण बाढ़ के बाद पंजाब में जन–धन की सुरक्षा के लिए बांधों का पूर्ण जल भंडारण स्तर (FRL) कम किया गया था।
2019, 2023 और 2025 में आई बाढ़ों ने सिद्ध किया कि मौजूदा FRL ही सुरक्षित है और इसे बढ़ाना पंजाब के हित में नहीं होगा।
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