March 25, 2026

रूस से 6 करोड़ बैरल तेल खरीद, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

रूस से 6 करोड़ बैरल तेल खरीद...

नई दिल्ली, 25 मार्च: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश की रिफाइनरियों ने अप्रैल डिलीवरी के लिए रूस से करीब 60 मिलियन (6 करोड़) बैरल कच्चा तेल खरीदा है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं।

जानकारी के मुताबिक, यह तेल ब्रेंट के मुकाबले 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल (करीब 470 से 1410 रुपये प्रति 158 लीटर) के प्रीमियम पर खरीदा गया है। यह खरीद मार्च के स्तर के बराबर है, लेकिन फरवरी के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। इससे साफ है कि भारत ने संभावित संकट को देखते हुए पहले ही स्टॉक बढ़ा लिया है।

अमेरिका से मिली विशेष छूट

इस बड़े फैसले के पीछे एक अहम कारण अमेरिका की ओर से दी गई विशेष छूट है। अमेरिका ने भारत को ऐसे रूसी कार्गो स्वीकार करने की अनुमति दी है जो 5 मार्च (बाद में 12 मार्च) से पहले जहाजों पर लोड किए गए थे, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से पैदा हुई कमी को पूरा किया जा सके।

दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, तेजी से वैकल्पिक स्रोत तलाश रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मैंगलोर रिफाइनरी और हिंदुस्तान मित्तल एनर्जी जैसी कंपनियां, जिन्होंने दिसंबर के बाद रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी, अब फिर से बाजार में सक्रिय हो गई हैं। यह संकेत है कि भारत सस्ते और उपलब्ध विकल्पों की ओर व्यावहारिक तरीके से बढ़ रहा है।

सप्लाई में विविधता पर जोर

भारत सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपनी सप्लाई को विविध बनाने पर भी ध्यान दे रहा है। अप्रैल के लिए वेनेजुएला से करीब 8 मिलियन बैरल तेल खरीदने का अनुमान है, जो अक्टूबर 2020 के बाद सबसे ज्यादा है।

कुल मिलाकर, कच्चे तेल के संभावित संकट के बीच भारत ने समय रहते बड़ा कदम उठाया है। इससे न सिर्फ सप्लाई सुरक्षित होगी, बल्कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी राहत मिलने की उम्मीद है।