वैंकूवर, 16 सितंबर : पंजाब में बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के नाम पर कनाडा के विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा की जा रही वसूली पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि धन संग्रह करने वाली अधिकांश संस्थाएँ कनाडा से धन एकत्र कर भारत भेजने के लिए पंजीकृत नहीं हैं। इस संबंध में केवल शिरोमणि कमेटी ही पंजीकृत है और उस पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। ब्रैम्पटन के सामाजिक कार्यकर्ता नरिंदर सिंह ने कहा कि खालसा एड, कनाडाई पंजाबी रेडियो स्टेशन और अन्य द्वारा धन संग्रह किया जा रहा है, लेकिन उनमें से अधिकांश पंजीकरण की कमी के कारण भारत को धन नहीं भेज सकते हैं।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ज़ोर
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा 2010 में विदेशी अंशदान अधिनियम पारित किया गया था, जो भारतीय व्यक्तियों, संगठनों और कंपनियों द्वारा विदेशी धन प्राप्त करने और उसके उपयोग के उद्देश्यों को प्रतिबंधित करता है। यह कानून विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ज़ोर देता है। उन्होंने कहा कि दान देने से पहले, दानदाताओं को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि संबंधित संगठन भारत के एफसीआरए के अंतर्गत पंजीकृत है या नहीं।
खालसा एड के निदेशक रवि सिंह के निजी सहायक से ईमेल के ज़रिए इस मामले में संगठन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला। 2023 में आई बाढ़ के दौरान एक इंटरव्यू में रवि सिंह ने माना था कि रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से वे विदेशों से इकट्ठा किया गया पैसा भारत नहीं भेज पाए थे। भारत सरकार की सूची में खालसा एड का नाम शामिल होने का भी कोई संकेत नहीं है।
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